Uttarakhand Madrasa: उत्तराखंड में शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त और मान्यता के लिए आवेदन करने वाले 206 मदरसों की साप्ताहिक छुट्टी की व्यवस्था में बदलाव किया गया है. उत्तराखंड के मदरसों में अब शुक्रवार को छुट्टी नहीं होगी. राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने इस संबंध में शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.

उत्तराखंड सरकार ने 1 जुलाई 2026 से पुराने मदरसा शिक्षा बोर्ड की जगह उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (USAME) की व्यवस्था लागू की है. अब मुस्लिम समुदाय के साथ सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी समुदायों के शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता से जुड़े मामले भी इसी ढांचे के अंतर्गत आएंगे.

एक समान शैक्षणिक कैलेंडर से परीक्षा, पाठ्यक्रम, शिक्षकों की उपलब्धता और दूसरे विद्यालयों के साथ शैक्षणिक समन्वय आसान हो सकता है. यदि मदरसों में आधुनिक विषयों की पढ़ाई और विद्यार्थियों के भविष्य को बेहतर बनाने का लक्ष्य है, तो नियमित शैक्षणिक व्यवस्था निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है. लेकिन यह परिवर्तन अगर राजनीतिक ध्रुवीकरण की नीयत या साम्प्रदायिकता भड़काने के उद्देश्य से हुआ है तो अति निंदनीय है.

यदि सरकार मदरसों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना चाहती है, तो उसे पाठ्यक्रम, प्रशिक्षित शिक्षकों, पुस्तकालयों, डिजिटल सुविधाओं और विद्यार्थियों के भविष्य पर भी उतना ही ध्यान देना होगा जितना प्रशासनिक नियमों पर दिया जा रहा है.

रविवार को छुट्टी करना अपने आप में न तो शिक्षा सुधार का प्रमाण है और न ही धार्मिक स्वतंत्रता के हनन का. फैसले की वास्तविक कसौटी यह होगी कि क्या इससे बच्चों की शिक्षा बेहतर होती है, क्या नियम निष्पक्ष ढंग से लागू होते हैं और क्या धार्मिक स्वतंत्रता तथा संस्थागत स्वायत्तता का सम्मान बना रहता है?

मदरसों को सामान्य विद्यालयों की समय-सारणी के अनुरूप लाने भर से बात नहीं बनेगी. बल्कि ऐसी शिक्षा व्यवस्था बनाने से बनेगी जिसमें सभी धर्म-समुदायों के बच्चों के लिए आधुनिक शिक्षा, समान अवसर और संवैधानिक अधिकार शामिल हो. Uttarakhand Madrasa

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