BJP Politics: भारतीय जनता पार्टी की सरकार 2 लाइनों में काम करती है. एक लाइन है सत्ता की जिस में वह पौराणिक राजाओं की तरह चक्रवर्ती बनने के लिए सामदामदंडभेद का उपयोग करती है. इस के लिए पैसा, ईडी, सीबीआई, दलबदल और गोदी मीडिया को अपने हथियारों के तौर पर इस्तेमाल करती है. दूसरी लाइन है धर्म प्रचार जिस में वह अपने लाखों प्रचारकों को भगवा कपड़े पहना कर उन्हें या तो स्वामी बना कर इस्तेमाल करती है या अंधाभक्त बना कर सडक़ों पर जब चाहे उन से नाचगाना कराती है. दोनों का मकसद एक ही है: जनता से वसूली.

पौराणिक उपन्यासों में कहीं भी देवीदेवता, उन के अनुयायी राजा और राजाओं पर प्रजा के लिए जनहित के काम करने का दबाव नहीं है. अगर कोई जनहित के काम का उल्लेख है तो वह सिर्फ यज्ञ कराना है जिस के अंत में विशेष तौर पर आमंत्रित किए गए ऋषियों, मुनियों, ब्राह्मणों को सहस्र गाएं, भरपूर सोना, दासदासियां दान में देने का आदेश है जो बारबार उल्लिखित है. राजाओं के पास ये गाएं, सोने के भंडार, ये दासदासियां आती कहां से थीं?

चक्रवर्ती बनने के लिए राजाओं को सैनिकों की जरूरत होती थी. ये कहां से आते थे? सैनिकों का खाना कौन देता था? सेना में लडऩे, मरने और मारने वाले कौन थे? वे हिंदू धर्म की रक्षा करते थे, देवीदेवताओं की रक्षा करते थे, राजा की रक्षा करते थे. लेकिन क्या वे जनता की रक्षा करते थे, इस बात का उल्लेख पौराणिक उपन्यासों में कहीं नहीं मिलता. अगर पूरा ज्ञान इन ग्रंथों में भरा पड़ा है तो यह ज्ञान भी लिखा ही होना चाहिए.

यह बात यहां कही इसलिए जा रही है क्योंकि आज की भारतीय जनता पार्टी की सरकार भी इसी तरह की लाइनों पर चल रही है.

एक तरह वह दानपुण्य ऋषियोंमुनियों को दे रही है जिस के लिए उस ने मंदिरों के केंद्र खुलवा दिए हैं जहां से भरपूर लूट मचवा दी. दूसरी ओर वह जनहित का जो भी काम करती नजर आ रही है उस में वे सडक़ें बन रही हैं जो या तो मंदिरों-तीर्थों तक ले जाती हैं या राजा की सेनाओं को चक्रवर्ती बनाने में सहायक हैं.

अगर देश का विकास हो रहा है तो यह यहां की जनता की कर्मठता है कि वह विषम स्थितियों में भी भरपूर उत्पादन कर सकती है. यहां का किसान भूखे पेट रह कर तपती धूप, कडक़ड़ाती ठंड और बारिश व ओलों में अनाज पैदा करता है. व्यापारी और उद्योगपति जितना उन से संभव होता है उत्पादन को प्रोसैस करते हैं व उसे जनता तक पहुंचाते हैं, जनता की सुविधाएं बढ़ाते हैं, सरकार को टैक्स देते हैं और सरकार के पाले गए भगवाधारियों को दान देते हैं. वे सरकार के नेताओं की ऋषियोंमुनियों की तरह पूजा करते है और इन ऋषियोंमुनियों के आदेशों को राजा का आदेश मान कर तनमनधन से सेवा करते हैं.

यह सब पहले भी होता था पर भारतीय जनता पार्टी सरकार के काल में बढ़ गया है. लगता है भाजपा का सत्ता में बैठने का एकमात्र लक्ष्य अपनी और ऋषियोंमुनियों की सेवा करवाना रह गया है. यह भगवा सरकार की चतुराई है कि जनता को समझा दिया गया कि उस का कल्याण इन्हीं लाइनों पर चल कर होगा, सेवा करने पर होगा. चतुराई इतनी अधिक है कि जैसे पौराणिक ग्रंथों में ऋषियोंमुनियों का एकमात्र काम किसी पधारे बड़े मुनि से कहानियां सुनना और फिर आगे सुनाना रहा था वैसा ही सरकार समर्थक आज मीडिया बन गया है जो रातदिन कांवड़ यात्रा के भोंपुओं की तरह एक ही बात दोहराता रहता है और जनता मुग्ध हो कर सुनती रहती है. BJP Politics

 

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