Ayurvedic Products: कमाने बाला अगर अपनी पर उतारू हो आए तो हवा, पानी और मिटटी, गोबर तक बेच कर खरबों कमा सकता है तो ये तो फिर भी रामदेव हैं जिन्होंने योग जैसी कसरत और आयुर्वेद नाम की कथित चिकित्सा पद्धति के दम पर विदेशों तक में टापू खरीद डाले. रामदेव का न्यू लांच आयुर्वेदिक हुक्का है. जिसका सेवन और लत आपको केंसरग्रस्त तक बना सकते हैं यह और बात है कि कल को यही रामदेव कहेंगे कि कोई बात नहीं हमारे पास उसका भी इलाज है.

कैसे हुक्के से केंसर हो सकता है, उससे पहले इस आयुर्वेदिक हुक्के के बारे में जान समझ लें जो रामदेव के हर प्रोडक्ट की तरह ही चमत्कारी और लाभप्रद है. चमत्कारी वह आयटम नहीं होता जिसे लेने से आपका कोई फायदा हो बल्कि वह प्रोडक्ट होता है जिसके बारे में पढ़कर या जानकर आपको ऐसा लगाया जाए कि इसका इस्तेमाल नहीं किया तो खुद का बड़ा नुकसान खुद ही कर डाला.
रामदेव के एक वायरल वीडियो जिसमे वे एक महिला को हुक्के के कश ( सुट्टे ) खींचने बाबत प्रोत्साहित करते नजर आ रहे हैं के मुताबिक इस आयुर्वेदिक हुक्के में देसी गाय के घी सहित जड़ी बूटियां मसलन मुलेठी, हल्दी, राई, काकड़ा सिमी और देसी कपूर उनके बताए मुताबिक आपको मिलाना है.

इसके कश लेने के बाद आपकी बंद नाक खुल जाएगी, खांसी में राहत मिलेगी, बलगम निकल जाएगा और वात, पित्त, कफ जिसे त्रिदोष कहा जाता है बेलेंस होंगे. इसका जिक्र चरक संहिता में मिलता है.
आज की जेन अल्फ़ा यानी बच्चा बच्चा जानता है कि विक्स लगा लेने से बंद नाक खुल जाती है और खांसी की ढेर दवाइयां केमिस्ट के यहाँ बिना डाक्टरी पर्चे के मिल जाती हैं क्योंकि ये ओवर द काउन्टर होती हैं. अब इन मामूली बीमारियों के लिए भला कोई क्यों आयुर्वेदिक हुक्का तैयार करने की कवायद करेगा. वह हुक्के का रेडीमेड मसाला ही लेना पसंद करेगा जो पतंजलि मुहैया कराएगी. रामदेव इस प्रचार की आड़ में गाय के दूध से बना अपना महंगा देसी घी भी बेचना चाहते हैं. दूसरे वे आम लोगों को हुक्के की लत लगाना चाहते हैं. जिससे लोगों को कैसर हो और वे अपनी महँगी दवाइयां आसानी से बेच सकें.

कानून की हदों के पार

रामदेव सीधे सीधे कैंसर के इलाज का दावा नहीं करते हैं लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से कई दवाइयां कैंसर ठीक करने के नाम पर बेचते हैं. पतंजलि वेलनेस सेंटर जिसे योग ग्राम भी कहा जाता है में पतंजलि की कुछ चुनिंदा दवाओं के साथ योग, प्राणायाम और आहार यानी डाइट को मिलाकर वे कैंसरग्रस्त मरीजों में सुधार का दावा वे करते हैं.
यह जिज्ञासा होना स्वभाविक है कि जब वे वीडियोज के जरिए कैंसर में सुधार का दावा करते हैं तो सीधे सीधे उसके इलाज का दावा क्यों नहीं ठोक देते . असल में कानून इसमें आड़े आता है. भारत में ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज एक्ट 1954 के तहत कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज का विज्ञापन करना प्रतिबंधित है. सुप्रीम कोर्ट पहले ही रामदेव और पतंजलि को ऐसे दावों के बाबत वार्निंग दे चुका है.

इसके बाद भी रामदेव की पतंजलि फूड्स और पतंजलि आयुर्वेद दोनों कंपनियों का टर्न ओवर 50 हजार करोड़ के लगभग आँका जाता है. इतनी तगड़ी के कमाई के बाद भी तन पर मामूली गेरुआ कपडा डाले रखने बाले तथाकथित बाबा रामदेव अब हुक्का पिलाने के पीछे क्यों पड़ रहे हैं बात समझ से परे नहीं है. नपातुला सच यह है कि पैसो के लालच और हवस से दूर रहने की न कोई दवा अभी तक बनी है और न ही इस बाबत योग का कोई आसन सुनने में आया है.

हुक्के से कैंसर कैसे

आमतौर पर हुक्के में तम्बाकू ही भर कर पिया जाता है जिसमे निकोटीन का नशा होता है इसका सेवन करने बाले सेवन न करने बालों से इसके नुकसान ज्यादा जानते हैं. लेकिन लागी छूटे न बाली तर्ज पर उसे छोड़ नहीं पाते. आयुर्वेदिक हुक्का अभी विधिवत लांच नहीं हुआ है बल्कि एक वीडियो डालकर रामदेव इसका रेसपांस देखना चाह रहे हैं.
असल में नुकसान अकेला निकोटीन नहीं करता बल्कि हुक्के से फेफड़ों में जाने बाला धुँआ भी कम नुकसानदेह नहीं होता. बीडी, सिगरेट की तरह ही हुक्के का धुआ भी फेफड़ों को कमजोर करता है जिससे ब्रोकाइटिस और सांस फूलने जैसी बीमारिया होती हैं. मेडिकल साइंस के मुताबिक इससे सीओपीडी यानी क्रानिक आब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज का खतरा बढ़ता है जो फेफड़ों के कैंसर के खतरे को दो से लेकर छह गुना तक बढ़ाता है.

मेडिकल साइंस यह भी कहती है कि धुएं में कैंसर पैदा करने बाले केमिकल्स जिन्हें कार्सिनोजेन कहा जाता है पाए जाते हैं. इनसे फेफड़ों के अलावा मुंह, गला, पेट, ब्लेडर और अन्ननली तक का कैंसर हो सकता है. जब धुआ रक्त वाहिकाओं पर जाता है तो वह ब्लडप्रेशर और हार्टबीट भी बढ़ाता है इससे धमनियां सख्त होती हैं.आमतौर पर स्ट्रोक और हार्टअटैक की यह अहम वजह होती है.
धुएं के ज्यादा मात्रा में अंदर जाने से कार्बन मोनोआक्साइड की अधिकता और आक्सीजन की कमी हो जाती है. नुकसानदेह भारी धातुएं लेड और कैडमियम भी शरीर में जमा होती हैं. लेकिन हुक्के का एक बड़ा खतरा इन्फेक्शन का भी होता है क्योंकि अक्सर हुक्का महफिल में बैठकर पिया जाने लगा है. एक ही हुक्का बारी बारी से कई लोग गुडगुडाते हैं जिससे इन्फेक्शन फैलता है. हुक्का आयुर्वेदिक हो या निकोटीन बाला हो पीने बालों को इसका धुँआ दौ सौ सिगरेटों तक के धुएं के बराबर नुकसान पहुंचाता है.

रामदेव के आयुर्वेदिक हुक्के के मद्देनजर आईआईटी गांधीनगर का हालिया यह निष्कर्ष ध्यान में रखा जाना चाहिए कि हर्बल धुँआ भी निकोटीन या दूसरे किसी भी धुएं के बराबर ही नुकसानदेह होता है. बल्कि कई बार तो उससे भी ज्यादा होता है. इसमे अल्ट्राफाइन पार्टिकल्स के साथ साथ कार्बन मोनोआक्साइड और टार भी ज्यादा होते हैं. जाहिर है हर्बल धुएं की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने की क्षमता जिसे आक्सीडेटिव पोटेंशियल कहा जाता है तंबाकू से ज्यादा भी हो सकती है

सार यह कि धुँआ धुंआ है वह नुकसान तो हर हाल में करता है. ऐसे में हर्बल या जड़ी बूटियों के धुएं को कारगर या फायदेमंद बताना एक और बड़ी ठगी की तैयारी रामदेव की है. जिन्हें न साइंस का इल्म है न उससे कोई सरोकार है उनका मकसद जैसे भी हो पैसा कमाना है आयुर्वेदिक हुक्का उसी की तयारी है अब हम आप के खबरदार रहने की बारी है. Ayurvedic Products

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