Mayawati Akash Anand Controversy: मायावती ने 10 सितंबर 2026 को भतीजे आकाश आनंद को BSP से पूरी तरह मुक्त कर दिया. यही वही आकाश है जिसे जून 2024 में मायावती ने उत्तराधिकारी घोषित किया था, मई 2024 में अपरिपक्व कहकर हटाया और फिर मार्च 2025 में पार्टी से निकाला, आकाश ने माफ़ी मांगी तब वह फिर से पार्टी में आये. 3 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाया और अब फिर उन्हें पूरी तरह बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.
इस बार बहाना नया है. मायावती ने कहा था अगर आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ संन्यास ले लें तो आकाश को वापस लेंगे. सिद्धार्थ ने संन्यास ले भी लिया लेकिन मायावती ने X पर 9 पॉइंट का पोस्ट लिखकर कहा कि सिद्धार्थ ने देर से फैसला लिया अगर पहले ले लेते तो BSP को नुकसान न होता इसलिए आकाश को भी आज से फ्री किया जाता है. मतलब ससुर ने संन्यास लिया तो दामाद को सजा मिली.
कांशीराम ने कहा था BSP किसी एक व्यक्ति की जागीर नहीं, एक मिशन है. आज BSP क्या है? भाई आनंद कुमार राष्ट्रीय संयोजक, भतीजा आकाश कभी उत्तराधिकारी कभी बेदखल, भतीजे का ससुर अशोक सिद्धार्थ कभी राज्यसभा सांसद कभी गद्दार. पार्टी के बाहर कार्यकर्ता नहीं हैं और घर के अंदर के अभी रिश्तेदारों का ही हिसाब चल रहा है.
मायावती कहती हैं आकाश गैर-मिशनरी है, स्वार्थी है, अहंकारी है. सवाल यह है कि आकाश को मिशनरी किसने बनाना था? BSP में पिछले 10 साल में कैडर कैंप कब लगा? जिला स्तर पर बहुजन समाज के युवाओं को मंच कब दिया? जब पूरी पार्टी में सिर्फ एक परिवार की फोटो और बाकी सब मौन दर्शक हों तो युवा मिशनरी बनेगा कैसे?
अगर आकाश गैर-मिशनरी है तो मायावती उन्हें बार-बार वापस क्यों लाती हैं? यह सांप-सीढ़ी का खेल दलित राजनीति को कहाँ ले जा रहा है? आज उत्तर प्रदेश में BSP का वोट 12.8 परसेंट से गिरकर 9 परसेंट के आसपास आ गया है. विधानसभा में मात्र 1 विधायक ही बचा है लेकिन मायावती प्रेस रिलीज में अभी भी दावा करती हैं कि पांचवीं बार सरकार बनाने की तैयारी है. यह तैयारी है या आत्ममुग्धता यह तो वही बता पाएंगी लेकिन आकाश आनंद के आने जाने के तमाशे पर उन्हें अपने अनुयाइयों को संतोषजनक जवाब तो देना ही चाहिए.
बहुजन आंदोलन के लिए सबसे बड़ा खतरा कोई और पार्टी नहीं, बसपा का अपना नेतृत्व ही नजर आ रहा है. मायावती पहले ही सब कुछ गंवा चुकी हैं. 2012 के बाद से एक भी बड़ा आंदोलन BSP ने नहीं किया. आकाश को निकालने से BSP और छोटी होगी लेकिन मायावती को यह समझ नहीं आएगा क्योंकि अब पार्टी किसी राजनैतिक मूवमेंट से ज्यादा किसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चल रही है जहाँ CEO तय करती है कि भतीजे को कब प्रमोट करना है, कब फायर करना है. दलित राजनीति को आज वारिस नहीं, विचार चाहिए. जब तक BSP में परिवार के बाहर का कोई दलित युवा अध्यक्ष नहीं बनेगा, तब तक इस तरह की ड्रामेबाजी से हेडलाइन तो बन जाएगी लेकिन इतिहास नहीं बदलेगा. Mayawati Akash Anand Controversy





