UPTET Controversy: उत्तर प्रदेश में शिक्षक बनने का सपना देख रहे हजारों स्टूडैंट्स के लिए इस बार यूपी टीईटी का एग्जाम सिर्फ कठिन नहीं था बल्कि विवादों से भी भरा रहा. जब नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है तो यूपी जैसे राज्य के एग्जाम का क्या हाल होगा? अभी हाल ही में यूपी-टीईटी के एग्जाम के बाद भी गजब की लापरवाही नजर आई जब एक साधारण से मुहावरे का ऐसा अर्थ निकाला गया जिसे देख कर अभ्यर्थी हैरान रह गए.

3 जुलाई, 2026 को आयोजित यूपी टीईटी की परीक्षा में हिंदी का एक सवाल पूछा गया- ‘एक आंख से देखना’ मुहावरे का अर्थ क्या है? 8 जुलाई को जारी आंसर की में आयोग ने इस का सही उत्तर ‘अंधाधुंध करना’ बताया. यहीं से विवाद शुरू हो गया.

स्टूडैंट्स का कहना है कि ‘एक आंख से देखना’ का सामान्य अर्थ ‘सब के साथ समान व्यवहार करना’, ‘पक्षपात न करना’ या ‘सब को बराबर समझना’ होता है जबकि ‘अंधाधुंध करना’ का अर्थ बिलकुल अलग है. बिना सोचेसमझे, बिना विवेक के कोई काम करना यानी दोनों का आपस में कोई सीधा संबंध नहीं है. असल में आयोग ने एक आंख से देख कर ही बिना सोचेसमझे, बिना विवेक के ‘अंधाधुंध’ जवाब दे कर यह साबित किया है कि आयोग में समझदार और पढ़ेलिखे लोगों का अभाव है. असल में वे स्टूडैंट्स ‘दिमागी नक्सल’ हैं जिन्होंने ब्रह्मज्ञान प्राप्त टैस्ट लेने वाली सरकारी संस्था पर सवाल उठाए.

हिंदी की ज्यादातर डिक्शनरी, शब्दकोशों और मुहावरा संग्रहों में ‘एक आंख से देखना’ का अर्थ समान दृष्टि रखना या भेदभाव न करना ही है. दूसरी ओर ‘अंधाधुंध’ शब्द का अर्थ है, बिना सोचेसमझे काम करना या बिना किसी नियंत्रण के अंधेपन की तरह काम करना. दोनों अर्थ अलगअलग हैं, इसलिए अभ्यर्थियों का यह कहना कि आंसर की में गलती हुई है, बिलकुल सही है. मामला सिर्फ एक गलत सवाल का नहीं, अभ्यर्थियों ने संस्कृत के एक प्रश्न पर भी आपत्ति जताई है.

प्रश्न था, ‘निम्न में से ऊष्म वर्ण कौन सा है?’ आंसर की में आयोग ने ‘न’ को सही माना जबकि एसपिरैंट्स का कहना है कि संस्कृत ग्रामर के अनुसार ‘ष’ ऊष्म वर्ण है. यदि यह दावा सही है तो यह भी उत्तरकुंजी की बड़ी गलती होगी.

यह विवाद केवल एक मुहावरे का मामला भर नहीं है यह उस व्यवस्था का आईना है जिस में लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा होता है. अगर आंसर की में गलती हुई है तो आयोग को बिना किसी अहंकार के उसे तुरंत सुधारना चाहिए क्योंकि शिक्षक वही बनेंगे जो आगे लाखों बच्चों को भाषा, व्याकरण और ज्ञान सिखाएंगे. यदि शुरुआत ही गलत उत्तर से होगी तो शिक्षा की नींव कैसे मजबूत होगी? असली सवाल तो यह है कि परीक्षा में बैठने वालों में दिमाग कहां से आया कि वे जवाब मांगने लगे? मौजूदा सरकार की नजर में तो यह विद्रोह है. UPTET Controversy

 

 

 

 

 

 

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