Jantar Mantar Protest: 23 दिन तक शांतिपूर्ण तरीके से चलने वाले आंदोलन और 20 दिन तक सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के बाद अचानक ऐसा क्या हुआ कि दिल्ली के जंतर मंतर पर चारों दिशाओं से लोगों का हुजूम उमड़ने लगा? दरअसल आंदोलन में अचानक तब उबाल आ गया जब दिल्ली पुलिस ने वांगचुक की बिगड़ती सेहत और अदालत के आदेश का हवाला देते हुए उन्हें शनिवार की सुबह लगभग साढ़े छह बजे सफ़ेद चादर में घेर कर जंतर-मंतर से से उठा कर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कर दिया. वांगचुक की पत्नी- गीतांजलि जे अंगमो ने पुलिस की इस कार्रवाई को अवैध हिरासत करार दिया.

 

पुलिस की ओर से वांगचुक को जबरन हटाए जाने और उसी दिन खुद पर हुए एक स्याही हमले से आक्रोशित होकर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी मांगें तेज कर दीं और शिक्षा मंत्री के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की भी मांग की. दीपके ने वांगचुक की जगह खुद अनशन पर बैठने का संकल्प लिया और अपने समर्थकों से 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन ‘संसद चलो’ मार्च में शामिल होने का निर्णायक आह्वान किया, जिसके बाद हजारों युवा लगातार इस मार्च के लिए जंतर-मंतर पर जुटते चले गए.

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संसद के अंदर बाहर बवाल ही बवाल

20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था – ऐतिहासिक होगा मानसून सत्र ……. और वाकई मानसून सत्र ऐतिहासिक हो गया. ऐसा मानसून सत्र जो देश ने पहले कभी नहीं देखा था. संसद के भीतर मोदी सरकार पर विपक्ष का हल्ला बोला तो संसद के बाहर कॉकरोच जनता पार्टी का हल्ला बोल. देश भर से जंतर मंतर पर आ जुटे छात्रों, टीचरों, समाजसेवियों, फ़िल्मी हस्तियों, नेताओं और आम जनता ने जब तेज बारिश में भीगते हुए जंतर मंतर से संसद की तरफ मार्च शुरू किया तो उन्हें रोकने में पुलिस और पैरा मिलिट्री फोर्सेज के हाथ पैर फूल गए.

बच्चों पर लाठीचार्ज हुआ और अश्रु गैस के गोले छोड़े गए. संसद के भीतर जहाँ सत्र को छह बार रोकना पड़ा वहीं प्रदर्शनकारी संसद के भीतर न पहुंच जाएँ इस डर से पुलिस को संसद के गेट पर ताले मारने पड़े.

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मजाक और व्यंग से शुरू हुई पार्टी ने सरकार को हिला दिया

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का आंदोलन एक व्यंग्य और मजाक से शुरू हुआ था. इस आंदोलन की शुरुआत तब हुई, जब भारत के चीफ जस्टिस ने सरकार के आलोचकों और बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच और परजीवी से कर दी थी.

इसके बाद बॉस्टन यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पूछा, “क्या होगा अगर सभी कॉकरोच एक साथ आ जाएं?” इसके तुरंत बाद दीपके ने लोगों को जोड़ने के लिए एक वेबसाइट बनाई और उनके इंस्टाग्राम पेज पर लाखों फॉलोअर्स जुड़ गए. देखते ही देखते फॉलोअर्स की ये संख्या देश की सबसे बड़ी पार्टियों भाजपा और कांग्रेस से भी ज्यादा हो गई. तब सीजेपी ने अपने पेज पर कई मांगें रखी. इनमें बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था, नेताओं के लगातार दल-बदल और अन्य मुद्दों को जोर-शोर से उठाया गया. ख़ास मांग थी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा. लगातार हो रहे पेपर लीक पर सरकार की जवाबदेही और 20 छात्रों की आत्महत्या का मामला,जिस पर मोदी सरकार के एक भी मंत्री या नेता का कोई छोटा सा बयान भी नहीं आया. Jantar Mantar Protest

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