Sheesh Mahal Controversy: राजनीति भी बड़ी अजीब चीज़ है. जिस बंगले को कल तक ‘शीशमहल’ बताकर जनता के गुस्से को केजरीवाल सरकार के खिलाफ भड़काया जा रहा था, आज वही बंगला सरकारी मेहमाननवाज़ी का ताजमहल बनने जा रहा है. केंद्र की भाजपा सरकार दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल के जिस आवास को शीशमहल कह कर उसे घोटाले का प्रतीक बताते नहीं थकती थी, उसी शीशमहल में अब दिल्ली की भाजपाई मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता अपने वीवीआईपी मेहमानों की मेजबानी करेगी! अब शीशमहल के शीशे किसी को नहीं चुभ रहे, बल्कि अब तो इन शीशों में वे अपना चेहरा देखने को उतावले हो रहे हैं.
दिल्ली की भाजपा सरकार ने सिविल लाइंस स्थित 6-फ्लैगस्टाफ रोड पर मौजूद पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आधिकारिक आवास को स्टेट गेस्ट हाउस और अत्याधुनिक कल्चरल सेंटर के रूप में विकसित करने की योजना बनायी है.
यहां सरकारी मेहमानों के लिए स्थायी सुविधा का इंतजाम किया जाएगा. देश-विदेश से यहां आने वाले सरकारी प्रतिनिधिमंडलों, विशिष्ट अतिथियों और उच्चस्तरीय अधिकारियों के ठहरने के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस गेस्ट हाउस तैयार किया जाएगा.
गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान ‘शीशमहल’ बड़ा चुनावी मुद्दा बना था. चुनाव के दिनों में इस बंगले के पर्दों से लेकर बाथरूम की टोंटियों तक का हिसाब जनता को बड़े जोरशोर से सुनाया गया था. करोड़ों के पर्दे, करोड़ों की फिटिंग और न जाने कितने करोड़ों की कहानियां गढ़ी गई थी. भाजपा ने दावा किया था कि इस शीशमहल में 4.5 करोड़ के पर्दे लगाए गए हैं. बाथरूम में 15 करोड़ की वॉटर सप्लाई और सेनेटरी फिटिंग करवाई गई है.
जनता को यकीन दिलाया गया था कि यह कोई मुख्यमंत्री आवास नहीं, बल्कि वह शाही महल है, जिस पर केजरीवाल ने दिल्ली की गरीब जनता के पैसे बर्बाद किये हैं. नई मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने तो यह कहकर नैतिक ऊँचाई भी हासिल कर ली थी कि वह इस बंगले में कदम तक नहीं रखेंगी. तब रेखा गुप्ता को दूसरा बंगला अलॉट किया गया था. मगर सच तो यह है कि उनकी नजर इस शीशमहल से कभी हटी ही नहीं. .
राजनीति में ‘ना’ का अर्थ अक्सर ‘अभी नहीं’ होता है. अब वही शीशमहल सरकार की आंखों का तारा बन गया है. यानी जिन संगमरमर की दीवारों पर कल तक फिजूलखर्ची के आरोप लिखे जा रहे थे, अब उन्हीं दीवारों के बीच वीवीआईपी मेहमान ठहरेंगे और सरकारी मेजबानी का गुणगान होगा.
जनता भी सोच रही है कि अगर यह वाकई इतना बुरा था तो इसे बचाकर क्यों रखा गया? और अगर इतना अच्छा है कि विदेशी मेहमानों को ठहराया जाएगा, तो फिर चुनावी सभाओं में इसे लोकतंत्र का सबसे बड़ा पाप क्यों बताया गया? Sheesh Mahal Controversy





