Artificial Intelligence: हाल ही में एक आईएएस अफसर को ले कर दावा किया गया कि उन्होंने अपने काम को दिखाने के लिए एआई से बनी तसवीरों का इस्तेमाल किया और उसी के आधार पर उन्हें नैशनल अवार्ड मिल गया. बाद में अफसर ने सफाई दी कि एआई इमेजेस का अवार्ड से कोई लेनादेना नहीं है, वे तसवीरें सिर्फ वैबसाइट पर जानकारी देने के लिए थीं.
लेकिन सवाल यह नहीं है कि अफसर सही हैं या गलत, सवाल यह है कि आज एआई इतना बारीकी से चीजों को मोर्फ कर रहा है कि आम आदमी के लिए असली और नकली में फर्क करना लगभग नामुमकिन हो गया है.
एआई से बना झूठ का पहाड़
पहले झूठ पकड़ने के लिए फोटो, वीडियो या आवाज सुबूत माने जाते थे. अब वही सुबूत शक के दायरे में हैं. एआई ऐसी तसवीरें बना सकता है जो कभी हुई ही नहीं, ऐसे वीडियो तैयार कर सकता है जिस में कोई इंसान वह बोलता दिखे जो उस ने कभी कहा ही नहीं. कभीकभार तो ऐसा देखा जाता है कि रियल से परफैक्ट फोटोज और वीडियोज तो एआई बना रहा है.
आज हालात ऐसे हैं कि किसी नेता का फेक वीडियो वायरल हो जाता है, जिस में वह भड़काऊ बयान देता दिखता है. बाद में पता चलता है कि वह डीपफेक था. हालांकि ऐसा हर बार नहीं होता लेकिन एआई अब कुछ बुरी करतूतों को अंजाम देने वालों की शील्ड भी बन गया है. जैसे, कुछ समय पहले एक पार्टी के नेता की किसी और्केस्ट्रा वाली लड़की के साथ अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर देखने को मिली. इस पर खूब हल्ला मचा.
बाद में नेता ने लोगों से यह कह कर सहानुभूति ले ली कि यह वीडियो तो एआई था. अब जब इस से पहले भी कई डीपफेक वीडियो सोशल मीडिया पर फैले हुए हैं तो सब को इस पर विश्वास भी हो गया.
इस के अलावा किसी लड़की की एआई से बनाई गई आपत्तिजनक तसवीरें सोशल मीडिया पर डाल दी जाती हैं, जिस से उस की निजी जिंदगी, कैरियर और मानसिक सेहत तबाह हो जाती है.
और तो और, कई लोगों को अपने रिश्तेदारों की एआई जेनरेटेड आवाज में कौल आती हैं कि, ‘मैं मुसीबत में हूं, पैसे भेजो’. लोग सच मान कर पैसे ट्रांसफर कर देते हैं. इसे वौयस क्लोनिंग कहा जाता है.
एआई का सब से खतरनाक पहलू यही है कि यह पहचान को ही कन्फ्यूज कर देता है. सोचिए, अगर कल को कोई आप के मातापिता की एआई से बनी तसवीरें और वीडियो दिखा कर दावा करे कि वही आप के असली मांबाप हैं तो आप क्या करेंगे?
यह बात सुनने में फिल्मी लग सकती है, लेकिन टैक्नोलौजी जिस दिशा में जा रही है, वहां यह पूरी तरह नामुमकिन भी नहीं लगता. क्योंकि, इसे प्रूव करने के लिए आप को फोटोज या डीएनए रिपोर्ट का सहारा लेना पड़ेगा और जब फोटोज या कोई भी रिपोर्ट आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस के चलते मौर्फ्ड की जा सकती है तो भला किस चीज पर विश्वास किया जाए.
एआई की वजह से आईं असली परेशानियां
कई सैलिब्रिटीज ने शिकायत की है कि उन की फर्जी तसवीरें और वीडियो बना कर स्कैम किए जा रहे हैं या रील्स के जरिए व्यूज हासिल किए जा रहे हैं. इन वीडियोज में ऐक्टर्स को अश्लील दिखाया जाता है जिस के चलते अब कई बौलीवुड सैलिब्रिटीज ने कोर्ट से उन के पर्सनैलिटी राइट्स को ले कर गुहार लगाई है ताकि उन की फोटोज या आवाज का गलत इस्तेमाल न हो.
किसी कोर्ट केस में भी अब वीडियो और फोटो सुबूतों को जांचने में ज्यादा समय लग रहा है, क्योंकि हर चीज पर सवाल यह खड़ा हो रहा है कि कहीं यह एआई से बना तो नहीं? एआई असलियत छुपाने का भी आसान हथियार बन गया है. जब कोई नेता, अभिनेता या चर्चित हस्ती किसी मामले में फंसती है तो एआई जेनरेटिड इमेज या वीडियो बता कर बचने की कोशिश करता है.
समस्या यह है कि एआई की तकनीकों का इस्तेमाल हरकोई कर सकता है. बस, एक मोबाइल और इंटरनैट चाहिए. न कोई बड़ी लैब, न कोई विशेष अनुमति. और यही सब से बड़ा खतरा है कि कहीं सच की पहचान किया जाना खत्म न हो जाए.
जहां एक ओर एआई हमें सुविधाएं देता है जैसे मैडिकल रिसर्च, ट्रैफिक कंट्रोल या भाषा अनुवाद वहीं दूसरी ओर यह समाज में अविश्वास और डर पैदा कर रहा है. आने वाले समय में यह तय करना और मुश्किल होगा कि कौन सा चेहरा, कौन सी आवाज और कौन सी कहानी सच है.
अगर एआई का सही इस्तेमाल किया जाए तो यह इतना भी बुरा नहीं है. इस से काम आसान हुआ है, रिसर्च तेज हुई है, क्रिएटिविटी को नया प्लेटफौर्म मिला है लेकिन बिना नियम और सम?ादारी के इस्तेमाल किया गया एआई ?ाठ की फैक्ट्री बन सकता है.
अब जरूरत है कि लोग हर वायरल चीज पर आंख बंद कर भरोसा न करें, सरकार और संस्थाएं एआई से जुड़े सख्त नियम बनाएं और हम सब डिजिटल तौर पर थोड़े ज्यादा जागरूक बनें. क्योंकि, अगर आज हम ने एआई के झूठ को पहचानना नहीं सीखा तो कल सच को पहचान पाना शायद और भी मुश्किल हो जाएगा. Artificial Intelligence





