Couples Relationship Issues: टैक्नोलौजी ने अगर बहुतकुछ दिया है तो एवज में बहुतकुछ छीना भी है जिन में से अहम है सैक्स सुख जिस का सब से बड़ा दुश्मन मोबाइल फोन है जो बेडरूम में अगर पार्टनर से ज्यादा जरूरी लगने लगे तो यह खतरे की घंटी है. सैक्स सुख अगर सलीके से न मिले तो इस में गलती मोबाइल फोन की नहीं बल्कि खुद इसे इस्तेमाल करने वालों की है.
जायकेदार मनपसंद खाना, शांत गहरी नींद और आनंददायक सैक्स जो दिलोदिमाग को रिलैक्स कर दे, इन तीनों कुदरती सुखों के इकलौते दुश्मन का नाम है मोबाइल फोन जिस ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. जो डिवाइस और टैक्निक कनैक्ट करने को ईजाद हुई थी वह तेजी से लोगों को डिसकनैक्ट करने लगी है तो इस की जिम्मेदार वह नहीं बल्कि खुद वे लोग हैं जो इस के इतने गुलाम हो गए हैं कि ढंग से खानापीना और सोना तो दूर की बात, सलीके से सैक्स का भी लुत्फ नहीं उठा पा रहे.
मोबाइल फोन कैसे लोगों की सैक्स लाइफ को बेमजा कर रहा है, इस पर देशदुनिया की ढेरों रिसर्च, सर्वे और आंकड़े मौजूद हैं जिन की अहमियत इसी से समझ आती है कि आप इन का हिस्सा रहे हों या न लेकिन इन्हें पढ़ने के बाद खुद को इन आंकड़ों और अध्ययनों से कनैक्ट करने यानी इन का हिस्सा होने से मुंह नहीं मोड़ सकते. आइए कुछ पर नजर डालें.
– आस्ट्रेलिया टौक्स सर्वे के नतीजों के मुताबिक, 58 फीसदी कपल्स मानते हैं कि टैक्नोलौजी ने उन की सैक्स लाइफ पर बुरा असर डाला है. इस सर्वे में शामिल कुछ कपल्स के बयानों पर गौर करें तो पता लगता है कि वे कितने वास्तविक और हर किसी को टच करते हुए हैं-
एक – हमें एहसास हुआ कि हम जितना ज्यादा अपने फोन पर वक्त बिताते थे उतना ही ज्यादा हमारा झगड़ा होता था क्योंकि हम अब एकदूसरे के साथ तालमेल नहीं रख पा रहे थे और हमें ठीक से संवाद करना नहीं आ रहा था.
दो – जब लोग अपने पार्टनर्स के साथ होते समय, सैक्स करते समय या किसी भी अंतरंग क्षण में अपने फोन को बंद नहीं करते तो उन का ध्यान स्वाभाविक रूप से बंट जाता है.
तीन – मोबाइल फोन पर व्यस्त, समय का ध्यान न रखते हुए हमें जल्द ही एहसास हुआ कि कितना वक्त गुजर चुका है और अपने फोन को दूर रखने यानी इस्तेमाल करने के बाद हम सैक्स करने के लिए बहुत थक चुके थे.
कंडोम बनाने वाली ब्रिटेन की एक मशहूर कंपनी ड्यूरेक्स द्वारा कराए गए एक सर्वे के दो टूक निष्कर्षों के मुताबिक, स्मार्टफोन लोगों की सैक्स लाइफ को बरबाद कर रहा है. इस सर्वे में शामिल 40 फीसदी कपल्स ने माना कि स्मार्टफोन या टैबलेट के इस्तेमाल के चलते उन्होंने सैक्स करने में देरी की. कुछ दूसरे कपल्स ने माना कि उन्होंने सोशल मीडिया नोटिफिकेशन देखने या मैसेज का जवाब देने के लिए जल्दीजल्दी सैक्स किया. इस सर्वे के लीडर डाक्टर मार्क मेककार्मेक के मुताबिक, बेडरूम में मोबाइल फोन ले जाने से रिश्तों को संभावित रूप से गंभीर खतरा हो सकता है.
ड्यूरेक्स ने एक दिलचस्प प्रयोग करते हुए कपल्स से गुजारिश की कि वे बेडरूम में मोबाइल फोन न ले जाएं, फिर महसूस करें कि क्या फर्क पड़ा. जो कपल्स यह जानने के ख्वाहिशमंद थे कि स्मार्टफोन उन की सैक्स लाइफ को रोमांचक कैसे बना सकता है, वे यह जान कर हैरान हुए कि इस का जवाब ‘औफ बटन’ है. यानी, सैक्स करते वक्त फोन का बटन औफ कर देना चाहिए ताकि कोई व्यवधान पेश न आए जो ध्यान भंग कर सैक्स का मजा किरकिरा कर दे.
मोबाइल फोन कैसे सैक्स करने की फ्रीक्वैंसी भी कम कर रहा है, इस का जवाब कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के एक प्रोफैसर डैविड स्पीगेलहाल्टर की नई किताब ‘सैक्स बाय नंबर’ में मिलता है. उस के मुताबिक, आजकल एक कपल एक महीने में औसतन 3 बार ही सैक्स कर पा रहा है जबकि साल 2000 में यह फ्रीक्वैंसी 4 और 1990 में 5 बार थी. डैविड स्पीगेलहाल्टर इसे पर्सनल लाइफ में मोबाइल क्रांति का दखल करार देते हैं. जाहिर है, यौन असंतुष्टि की एक बड़ी वजह जेब में रखा मोबाइल फोन है.
भारत भी पीछे नहीं
इस समस्या से भारत और भारतीय कपल्स भी उतने ही ग्रस्त और त्रस्त हैं जितने कि यूरोप और अमेरिका के हैं या कहीं और के हो सकते हैं. रांची इंस्टिट्यूट औफ न्यूरो साईंकियाट्री एंड एलाइड साइंसेज यानी आरआईएमपीएस की एक खबर के मुताबिक, पिछले दिनों कम से कम 7 ऐसे न्यूली मैरिड कपल्स इलाज के लिए आए जिन्होंने अपने जीवनसाथी की तुलना में अपने मोबाइल फोन को ज्यादा वक्त दिया जिस से उन के रिश्ते में खटास और दरार दोनों आ गईं. इस संस्थान की क्लिनिकल साइकोलौजी की एसोसिएट प्रोफैसर डाक्टर नेहा सैय्यद बताती हैं, यहां आए कपल्स में से अधिकतर अपने स्मार्टफोन में व्यस्त रहने के कारण एकदूसरे में रुचि खो बैठे थे. चाहे वे इंटरनैट सर्फिंग कर रहे हों या फिर वीडियो गेम खेल रहे हों. कपल्स के बीच यौन या भावनात्मक अंतरंगता नहीं थी जिस से उन के बीच दूरी व मतभेद पैदा हो गए.
आरआईएमपीएस के ही क्लिनिकल साइकोलौजी के हैड औफ द डिपार्टमैंट डाक्टर अमूल रंजन के मुताबिक ऐसे पेरैंट्स भी आने लगे हैं जो अपने बच्चों के लिए इलाज और काउंसलिंग चाहते हैं. इन कपल्स ने माना कि वे आपस में बहुत कम बात करते हैं और अपने गैजेट्स के साथ ज्यादा वक्त गुजारते हैं. एक मामले का हवाला देते हुए डाक्टर रंजन बताते हैं कि रांची के एक युवक, जो बेंगलुरु में जौब कर रहा है, को डेटिंग वैबसाइट्स में अजनबियों से चैट करने की लत लग गई थी जिस की शिकायत उस की पत्नी ने ससुराल वालों से की तो वे उसे परामर्श के लिए यहां ले आए.
स्मार्टफोन बनाने वाली चीन की नामी कंपनी वीवो ने भारत के 8 प्रमुख बड़े शहरों में एक सर्वे किया था. इस के आंकड़े चिंताजनक ही आए. वीवो स्विच औफ स्टडी के निष्कर्ष का भी सार यही था कि स्मार्टफोन की लत शादीशुदा कपल्स के रिश्तों को बिगाड़ रही है. स्टडी के मुताबिक, भारतीय जोड़े रोज औसतन 5 घंटे मोबाइल फोन पर रहते हैं.
1.- 88 फीसदी कपल्स ने माना कि फोन के ज्यादा इस्तेमाल उन के रिश्ते को नुकसान पहुंचा रहा है.
2.- 73 फीसदी को अपने पार्टनर के ज्यादा फोन इस्तेमाल करने की शिकायत थी.
3.- 70 फीसदी कपल्स ने माना कि पार्टनर के फोन इस्तेमाल करते वक्त वे खीझ जाते हैं.
4.- 69 फीसदी कपल्स ने यह भी माना कि फोन की वजह से वे पार्टनर को पर्याप्त समय नहीं दे पाते हैं.
5.- 68 फीसदी कपल्स को ज्यादा फोन इस्तेमाल करने पर गिल्ट महसूस होता है.
इस स्टडी की खास बात 89 फीसदी कपल्स का यह मानना भी थी कि वे पार्टनर के साथ रिलैक्स मूड में बातचीत नहीं कर पाते. 86 फीसदी ने माना कि वे सोने से ठीक पहले मोबाइल फोन देखते हैं. 67 फीसदी ने स्वीकारा कि वे पार्टनर के साथ होते हुए भी फोन पर व्यस्त रहते हैं.
कहां गया वह जोश
ऐसे में तो फिर शादी और सैक्स का मतलब क्या रह गया जिस में सारा जोश मोबाइल निगल गया. वह दौर गुजरे अभी ज्यादा वक्त नहीं गुजरा है जब सुहागरात के दिन पत्नियां हाथ में दूध का गिलास लिए बेडरूम में दाखिल होती थीं और पति गिलास टेबल पर रख कर पत्नी को अपनी बांहों में खींच लेता था और फिर बत्ती बंद हो जाती थी. वह इतना आनंददायक सैक्स होता था कि सुबह होने पर पतिपत्नी फिर चुहुलबाजी करते हुए एक हो जाते थे. हिंदी फिल्मों में दिखाया जाने वाला यह सीन आम जिंदगी का भी सीन था जिस में तबदीली इतनी भर आई है कि अब पतिपत्नी दोनों के हाथों में मोबाइल फोन होता है.
दोनों की दिलचस्पी सैक्स और रोमांस से ज्यादा अपनेअपने मोबाइल फोन में ज्यादा रहती है. शादी की पहली रात से ही शुरू हुआ यह सिलसिला कभी टूटता नहीं है भले ही रिश्ता टूट जाए. भोपाल एमएनआईटी के कंप्यूटर विभाग के एक प्रोफैसर जिग्येंद्र यादव कहते हैं कि किसी भी शादी में देख लीजिए, प्रीतिभोज के दौरान भी अकसर पतिपत्नी हर दूसरे मिनट पर अपना फोन देखते नजर आते हैं.
ऐसे सामाजिक माहौल के दौरान एकदूसरे को कनखियों से देखने का रिवाज खत्म सा हो गया है. कोई मेहमान शुभकामनाएं और आशीर्वाद देने स्टेज पर आता है तो दोनों बुत की तरह खड़े हो जाते हैं और उस के जाने के बाद फिर फोन थाम लेते हैं. यह नजारा देख झल्लाहट और गुस्सा ऐसा आता है कि दोनों को एकएक थप्पड़ रसीद कर दिया जाए.
बकौल जिग्येंद्र, एक दौर था जब नवविवाहित पतिपत्नी सब से नजरें चुरा कर एकदूसरे को देखदेख कर मुसकरा दिया करते थे. असल में तब वे पिछली रात किए गए सैक्स को याद कर रहे होते थे. पति शाम से ही पत्नी के इर्दगिर्द चक्कर काटना शुरू कर देता था और पत्नी होंठ दबा कर मुसकरा दिया करती थी. वे इशारों में बातें कर आज की अपनी इच्छा और गई रात के अनुभव शेयर करते थे. असल में वे अब आज रात के लिए मूड बना रहे होते थे. पर अब कहां वह सब. दोनों ही मोबाइल में घुसे रहते हैं और सैक्स के नाम पर ऐसा लगता है मानो कोई भूखा आदमी ढाबे का कच्चापक्का लेकिन मसालेदार खाना, जिस के शुरुआती चारछह गरम निवाले जायकेदार लगते हैं, को खा कर पेट भरने की रस्म अदा कर रहा हो.
कपल्स में मोबाइल की लत कैसे उन्हें परेशान कर देती है, इस पर भोपाल के वरिष्ठ नामी मनोचिकित्सक और बीएसएस कालेज में साइकोलौजी के प्रोफैसर डाक्टर विनय मिश्रा बताते हैं कि उन के पास ढेरों युवा यह शिकायत ले कर आते हैं. ऐसे ही एक कपल हैं राहुल और प्रिया जिन की शादी 3 साल पहले हुई थी. अब राहुल रोज रात बिस्तर पर जाते ही मोबाइल थाम कर घंटों उस में लगा रहता है. व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, रील्स और औफिस के ईमेल वगैरह में वह उलझा रहता है. सो, प्रिया को लगता है कि यह स्क्रीन उस की सौत बन गई है.
ऐसा लगातार होने लगा तो दोनों में न केवल अंतरंगता घटने लगी बल्कि सैक्सुअल डिजायरनैस भी कम होने लगी. नतीजतन, दोनों में झगड़े होने लगे. विनय मिश्रा बताते हैं यह फबिंग लाखोंकरोड़ों कपल्स के हर तरह के सुखचैन छीन रही है. सैक्स उन में अहम है. एक स्टडी का हवाला देते हुए वे बताते हैं कि 74 फीसदी भारतीय कपल्स वीकैंड पर पार्टनर से सैक्स करने के बजाय फोन इस्तेमाल करते हैं. बेडरूम में फोन की ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन को बाधित करती है जिस से सैक्स डिजायर घटती है.
इस स्थिति से आगाह करते विनय मिश्रा बताते हैं कि इस की अति एन्गजायटी, डिप्रैशन और फोमो (फियर औफ मिसिंग आउट) बढ़ाती है. यूजर को दूसरे की जिंदगी खुद की जिंदगी से बेहतर लगने लगती है. इस से भी सैक्स पर फर्क पड़ता है. चूंकि हर कोई जानता है कि समस्या की जड़ कहां है और क्या है इसलिए खुद उसे ही इस खतरे को समझते मोबाइल का जरूरी और सीमित उपयोग करना चाहिए. बकौल विनय मिश्रा, खाली वक्त में किताबें और पत्रिकाएं पढ़ना एक बेहतर विकल्प है जिन की सामग्री दिमाग पर स्थाई छाप छोड़ती है और व्यक्तित्व निखारने के अलावा अपडेट भी रखती है.
दरअसल, शादी के पहले से ही पार्टनर और सैक्स से ज्यादा मोबाइल अहम होता है तो फिर एक बेहतर और आनंददायक सैक्स लाइफ की उम्मीद करना बेकार है. जो सैक्स उत्साह और ऊर्जा का पर्याय माना जाता है वह मोबाइल फोन की लत के चलते खत्म न सही कम तो हो ही रहा है. यह चिंताजनक बात इस लिहाज से ज्यादा है कि जब जिंदगी में सैक्स का जोश, उत्सुकता और लुत्फ नहीं रह जाते तो लोग खीझने और झल्लाने लगते हैं. अपनी इस हालत की जिम्मेदारी कहीं और या किसी और पर डालने के लिए वे ढाल ढूंढ़ा करते हैं, जबकि, मोबाइल नाम का घातक हथियार उन की अपनी जेब या हाथ में ही होता है.
इस हथियार ने लोगों से बटरफ्लाइ फीलिंग भी छीनी है. मनोविज्ञान के मुताबिक, बटरफ्लाई फीलिंग एक खूबसूरत फीलिंग है जो दिमाग और हार्मोन्स का रिऐक्शन है. इस में डोपामाइन एड्रेनालाइन और नारेपिनेफ्रीन हार्मोन्स का प्रैशर और लैवल तेजी से बढ़ता है. नतीजतन, पेट में हलकी गुदगुदी या उथलपुथल महसूस होती है. ऐसा अकसर तब होता है जब लोग किसी के प्रति ज्यादा आकर्षित होते हैं या उस के बारे में ज्यादा सोचते हैं या उस के नजदीक होते हैं. इस दौरान सांस पर से कंट्रोल हटना और गला सूखना भी आम होता है. अगर कपल्स, खासतौर से नवविवाहितों, में ऐसा नहीं हो रहा है तो तय है मोबाइल इस की वजह है जो कुछ और सोचने की इजाजत व फुरसत देता ही नहीं.
सिंगमंड फ्रायड से ले कर इस दौर तक के मनोविज्ञानी मानते हैं कि सैक्स में मन की अहमियत शरीर से कमतर नहीं. लेकिन जब दिमाग ही मोबाइल फोन के मैसेजेस और नोटिफिकेशंस में उलझा हो तो कोई कैसे इस का असली मजा ले सकता है. फसाद की असल जड़ कपल्स की कम होती कल्पनाशीलता है जिस का जिम्मेदार भी मोबाइल फोन दूसरे तरीके से है और वह तरीका है पोर्न फिल्में.
पोर्न के साइड इफैक्ट
यह बात किसी सुबूत की मुहताज नहीं कि पोर्न फिल्मों की सहज और सस्ती उपलब्धता ने कपल्स से सैक्स के प्रति उत्साह और उत्सुकता दोनों छीन लिए हैं. सहवास का रियल मजा सहवास की कल्पनाओं से हो कर जाता है जिस की अगली और वास्तविक स्टेज फोरप्ले है. आइए अब ड्यूरेक्स के सर्वे में उस पति या पत्नी के बयान पर गौर करें जिस में जल्दीजल्दी सैक्स कर लेने की बात मानी गई है.
गलत नहीं कहा जाता कि जल्दी का काम शैतान का होता है. यही अब सैक्स में होने लगा है. जो सैक्स लगभग 4 नहीं तो 3 घंटे चलना चाहिए वह अब 15-20 मिनट का शो रह गया है बिलकुल सोशल मीडिया की वीडियो क्लिपिंग्स की तरह जिन में स्पीड तो होती है लेकिन डायरैक्शन नहीं होता.
इलैक्ट्रौनिक गैजेट्स ने कैसेकैसे आम लोगों की सैक्स लाइफ पर असर डाला है, इसे समझने के लिए यही काफी है कि कोई 50 साल पहले सैक्स लाइफ थिएटर में चलने वाली 3 घंटे की मूवी, जिस में एक इंटरवल भी होता था, की तरह हुआ करती थी. टैलीविजन के दौर में यह आधा घंटे के सीरियल की तरह हो गई थी और अब सोशल मीडिया के दौर में मिनटों में खत्म हो जाती है जिस में लुत्फ सिर्फ स्खलित हो जाने का है. सैक्स का असली सुख या मजा या फिर आराम, जो सैक्स का अहम मकसद भी होता है, इस में नहीं है, इसलिए लोग ज्यादा कुंठित और तनाव में भी रहने लगे हैं.
इस हालत की जिम्मेदार पोर्न फिल्में हैं जिन्हें अब बच्चों से ले कर बूढ़े तक इफरात से देख रहे हैं क्योंकि ये मोबाइल फोन में सहूलियत से उपलब्ध हैं. ये रील्स कैसा असर कपल्स की सैक्स लाइफ पर डाल रही हैं, इस पर भी खूब रिसर्च और सर्वे हुए हैं जिन का सार यह है कि ये फिल्में या क्लिपिंग्स दिमाग को तेजी से उत्तेजित करती हैं क्योंकि डोपामाइन तेजी से रिलीज होता है. इसे वैज्ञानिक पोर्न इंड्यूस्ड इरैक्टाइल डिस्फंक्शन कहते हैं. इस में इरैक्शन तो आसानी से आ जाता है लेकिन चला भी उतनी ही जल्दी जाता है.
इरैक्टल डिस्फंक्शन की समस्या बहुत आम हो चली है जिस की एक बड़ी वजह पोर्न रील्स भी हैं. असल में ये रील्स कपल्स के बीच कोई भावनात्मक संबंध पैदा नहीं करतीं बल्कि जल्द और तेज सैक्स करने को उकसाती हैं. कभीकभार इन्हें देखा जाना हर्ज की बात नहीं लेकिन इन की लत लग जाए तो सैक्स लाइफ का बरबाद होना तय है. पोर्न से दूसरा बड़ा नुकसान पार्टनर से सबकुछ वैसा ही करने की उम्मीद करना है जैसा कि इन में दिखाया जाता है. चूंकि यह अव्यावहारिक होती हैं इसलिए मुमकिन भी नहीं होतीं.
तीसरी दिक्कत परफौर्मेंस की है जो पोर्न में इतनी अच्छी और लंबी होती है कि हर कोई वैसी ही चाहने लगता है. लेकिन लोग भूल जाते हैं कि यह शूट किया हुआ होता है, नकली होता है. रियल सैक्स में ऐसा होना संभव नहीं. हकीकत में स्वाभाविक उत्तेजना धीरेधीरे बढ़ती है, इसलिए सैक्स की मियाद भी लंबी होती है. रेडिमेड उत्तेजना क्षणिक होती है जिस के जल्दी खत्म होने से गिल्ट, निराशा, अवसाद और झुंझलाहट ही पैदा होते हैं. अब चूंकि यह सब उसी मोबाइल फोन में होता है जिस ने आप को दिया कम बल्कि छीना ज्यादा है इसलिए इस से बचें और पोर्न भी कम से कम देखें.
यह समझ लेना भी बेहद जरूरी है कि ये फिल्में या रील कोई ज्ञान या जानकारियां नहीं देतीं बल्कि दिलोदिमाग में कचरा ही ठूंसती हैं. इन में कोई कहानी या मैसेज नहीं होता बल्कि सहवास के कुछ तरीके बताए गए होते हैं. ये तरीके भी बेहद अव्यावहारिक, अवैज्ञानिक और एक हद तक फूहड़ भी होते हैं.
अकसर पोर्न रील्स में एक मेल और एक फीमेल पात्र स्क्रीन पर आते हैं और ताबड़तोड़ तरीके से सैक्स शुरू कर देते हैं. अधिकतर रील्स में वे ओरल सैक्स भी करते दिखाई देते हैं जो किसी को भी लुभाता और आकर्षित करता है. ओरल सैक्स बहुत ज्यादा हर्ज की बात नहीं बशर्ते इस में साफसफाई और पार्टनर की इच्छा का ध्यान रखा जाए. पार्टनर की असहमति हो तो इसे जबरन करना केवल सैक्स लाइफ को बल्कि लाइफ को ही बोझिल बना देता है. ऐसे कई मुकदमे अदालतों में चल रहे हैं जिन में पतिपत्नी में से किसी एक ने क्रूरता का आरोप इसी बिना पर लगाया है.
अधिकतर कपल्स इन रील्स को देखतेदेखते ओरल सैक्स को सुख की अनिवार्यता और गारंटी मान बैठने की गलती कर बैठते हैं. यही अधिकतर कपल्स चूंकि मोबाइल फोन में उलझे रहने के कारण खुद से उत्तेजित नहीं हो पाते इसलिए पोर्न देख कर चार्ज होने की कोशिश करते हैं. यह कृत्रिम उत्तेजना बहुत जल्द खत्म हो जाती है. नतीजा फुस्स.
ऐसे बचाएं खुद को
अगर आप को लगता है कि आप की सैक्स लाइफ पर मोबाइल फोन बुरा असर डाल रहा है तो उस से दूर रहें जो किसी चैलेंज से कम नहीं. यह नशा आसानी से पीछा नहीं छोड़ता. इसे अपनी विल पावर से ही छोड़ा जा सकता है. डाक्टर विनय मिश्रा की मानें तो बेडरूम को फोनफ्री जोन बनाएं और सिरहाने कोई किताब या मैगजीन रखें ताकि तलब लगने पर विकल्प पास में रहे.
शाम से ही मूड को रोमांटिक और सैक्सी रखने से सैक्स लंबा चलता है. इस दौरान पतिपत्नी को आपस में बातचीत भी करते रहना चाहिए. इस से मोबाइल फोन द्वारा फैलाई गई मनहूसियत भी दूर होती है और एकदूसरे से भावनात्मक निकटता भी बनी रहती है. और सब से अहम बात फोरप्ले जितना लंबा हो सके, खींचें. Couples Relationship Issues





