Youth Lifestyle: आज के समय में सोशल मीडिया प्लेटफौर्म्स पर कुछ न कुछ ट्रैंड चलता ही रहता है. कभी किसी वीडियोमेकिंग का, किसी गाने का तो कभी किसी डांस मूव का. इसी तरह कुछ समय से एक और ट्रैंड चल रहा है, ‘पोस्टिंग जीरो.’

‘पोस्टिंग जीरो’ कुछ समय से बाहरी देशों में थोड़ा ज्यादा देखे जाने वाला सोशल मीडिया का एक बढ़ता चलन है. जो विशेष रूप से जेन जेड के बीच और उन के द्वारा ही चलन में आया है. जहां जेन जेड सोशल मीडिया पर अपने व्यक्तिगत जीवन की बात या घटना शेयर करना बंद कर रहे हैं. अब वे दोस्तों के साथ लंच हो या डिनर, वीकली शौपिंग हो, सैल्फी, अपडेट या कोई भी व्यक्तिगत पोस्ट, अपने जीवन से जुड़ी कोई भी छोटीबड़ी बात का प्रदर्शन करना आदि सब बंद कर रहे हैं.

पोस्टिंग  जीरो शब्द सब से पहले काइल चायका द्वारा द न्यूयौर्कर के साप्ताहिक इन्फिनिट स्क्रौल में आया था जहां उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला था कि कैसे औनलाइन जीवन अपडेट साक्ष्य करने की होड़ अब कम होती जा रही है.

चाक्या ने समझया, ‘‘हम भी पोस्टिंग जीरो जैसी किसी चीज की ओर बढ़ रहे हैं, एक ऐसा बिंदु जहां सामान्य लोग : अव्यावसायिक, गैरवस्तुगत, अपरिष्कृत लोग- सोशल मीडिया पर चीजें साक्ष्य करना बंद कर देते हैं क्योंकि वे शोरशराबा, दिखावा और जोखिम से थक जाते हैं.’’

क्या है जेनजी का जीरो ट्रैंड

दरअसल, पोस्टिंग जीरो शब्द गूगल जीरो से प्रेरित है जहां सर्च इंजन ट्रैफिक को वैबसाइट पर नहीं भेजता क्योंकि एआई खुद सर्च किए गए विषय पर जवाब देता है.

हाल ही में किए गए एक सर्वे में सामने आया है कि दुनिया में सोशल मीडिया का यूज 10 फीसदी तक गिर गया है. यह सर्वे 50 देशों के 2.5 लाख सोशल मीडिया यूजर्स पर किया गया था. अब यहां हैरानी की बात यह है कि यह गिरावट उन्हीं युवाओं यानी जेन जेड में सब से ज्यादा है जिन के लिए सोशल मीडिया कभी उन की दैनिक जिंदगी का हिस्सा था. वे जेन जेड वाले जो सुबह होते ही दुनिया को गुडमौर्निंग बोलने से उन्होंने क्या खाया, क्या पहना, रात को कहां गए, इस की पूरी जानकारी बांटते फिरते हैं.

सोशल मीडिया से पीछे हटने का सब से बड़ा कारण निजी जीवन है. निजी जीवन जिसे उन्होंने एक सार्वजानिक इश्तिहार बना रखा है. यही जेन जेड अब अपने जीवन में गोपनीयता और मानसिक शांति के लिए सोशल मीडिया से हट रहे हैं.

सोशल मीडिया पर निरंतर मौजूद रहना, उस का शोर और एकदूसरे से आगे निकलने की प्रतिस्पर्धा से अभिभूत हो वे अपने जीवन में पूरी तरह से भटकते जा रहे हैं. शायद इसी भटकाव का आभास और इस से मिली मार की अनुभूति कुछ जेन जेड समझ चुके हैं और इस के सुधार के लिए वे सोशल मीडिया पर जीरो पोस्ंिटग द्वारा अपने जीवन में एक दायरा बना रहे हैं.

साथ ही, कमर्शियल विज्ञापनों, सोशल इन्फ्लुएंसर्स की होड़ ने और एआई से बने कंटैंट ने असलीनकली का फर्क, उस की अहमियत और कंटैंट की विश्वसनीयता पूरी तरह से संदेह में डाल दी है. यूजर्स को यह महसूस हो रहा है कि अब वास्तविक चीजों का मूल्य बहुत ही कम है, जिस से कि सोशल मीडिया के प्रति अब यूजर्स का मन ऊब रहा है.

पोस्टिंग जीरो को ‘डैड इंटरनैट थ्योरी’ से भी जोड़ा जा रहा है. ‘डैड इंटरनैट थ्योरी’ का संबंध एआई से है. जिस में देखने को मिलता है कि इंटरनैट का बड़ा हिस्सा अब इंसानों के बजाय बौट्स और एआई आधारित एलागोरिदम से भरा है. जिस से असली यूजर्स की उपस्थिति धीरेधीरे कम होती जा रही है.

एआई ने खराब किया अनुभव

साथ ही, सोशल मीडिया पर फैलता डीपफेक भी एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है. वहां लोगों की फेक पिक्चर्स, वीडियो और औडियो को बढ़चढ़ कर बनाया और इस्तेमाल किया जा रहा है. इस्तेमाल उन्हें बदनाम, परेशान और फंसाने के लिए. लोगों की प्राइवेसी को खराब कर, उन्हें स्कैम में भी फंसाया जा रहा है. आज कई लोग डीपफेक के ?ांसे में आ, ऐसे स्कैम का शिकार बन रहे हैं जहां उन का मानसिक शोषण किए जाने के साथ उन का बैंक बैलेंस भी लूटा जा रहा है. इन स्कैम्स से बढ़ता खतरा भी बहुत बड़ी चिंता का विषय है.

मगर क्या पोस्टिंग जीरो से सोशल मीडिया से होते खतरों को पूरी तरह से टाला जा सकता है?

जवाब है, नहीं. हां, मगर कुछ समय और सीमा तक यह आप को सोशल मीडिया के भ्रमजाल से कुछ हद तक दूर रख सकता है. पोस्टिंग जीरो का मतलब, सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव और खतरे का पूरी तरह अंत नहीं है, बल्कि, यह सिर्फ एक विकल्प है कुछ हद तक की एक दूरी बनाने का.

लेखिका – रजनी प्रसाद

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