Editorial : एक्स ने माना है कि उस के प्लेटफौर्म को आजकल अवैध कंटैंट के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है जिन में बच्चों के साथ यौन संबंध बनाने की फोटो तक शामिल हैं. एक्स अब इस तरह के कंटैंट को हटा देगा. एक्स का मतलब लोगों को उकसाने और उन्हें पकड़ कर रखना है और वह उन के अधिकारों, उन की इच्छाओं की या उन के चरित्र की चिंता कम करता है, अपने मुनाफे की ज्यादा. वह इसीलिए उन सरकारों से उल झना नहीं चाहता जो इस पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रही हैं.
सरकारें एक्स के इस फैसले से खुश ही होंगी क्योंकि पहले तो एक्स जैसे प्लेटफौर्मों ने समाचारपत्रों और पत्रिकाओं को नष्ट कर दिया जो सरकारों के लिए सिरदर्द थे क्योंकि वे सरकार की पोलपट्टी खोल सकते थे. एक्स अब, सरकार के कहे अनुसार, उन अकाउंटों को भी अवैध मान कर बंद कर देगा जो सरकार के खिलाफ बोलेंगे.
असल में इंटरनैट पर चल रहे सभी सोशल मीडिया प्लेटफौर्म या तो सरकारों का प्रचार कर रहे हैं या धर्म का. उन को सब से बड़ा समर्थन इन 2 से मिलता है. पैसा तो पौर्न या विज्ञापन देने वाली कंपनियों से मिल जाता है पर किसी भी देश में घुसने की इजाजत और लगातार बने रहने की इजाजत वहां की सरकार ही देती है.
इंटरनैट जनता के हकों के लिए न लड़ना चाहता है और न ही उस का वह मकसद है. उसे तो जो पैसा देगा, वह उस का गुलाम है. इंटरनैट ने चाहे लोगों की दूरियां समाप्त कर दी हों पर आज साफ दिख रहा है कि लोग पहले से ज्यादा अकेले हैं, कम संगठित हैं, गलतफहमियों के शिकार हैं और बहकाए जा रहे हैं. चाहे मामला सामान बेचने का हो, धर्म बेचने का हो या किसी देश के नेता को, इंटरनैट सदा ही उस के साथ रहता है जो ज्यादा पावरफुल है.
अमेरिका के सिलिकौन वैली में बैठे सौफ्टवेयर से एल्गोरिदम बनाने वालों का कोरा एक उद्देश्य है, मोटा पे पैकेज. वे भाड़े के सैनिक जैसे हैं जो किसी भी धर्म, देश, विद्रोही के लिए काम कर सकते हैं. एक्स, यूट्यूब, फेसबुक, व्हाट्सऐप, लिंक्डइन, थ्रैड, इंस्टाग्राम पर आप को धर्मविरोधी, सरकारविरोधी कंटैंट भी मिल जाएगा पर जो वहां रहते हैं वे वहां के धर्म की, सरकार की, उद्योगों की, स्टौक मार्केट की वाहवाही करते मिलेंगे. गरीबों के रोने का, सरकारों के अत्याचारों का, अमीरीगरीबी की बढ़ती खाई का, तर्क का, तथ्य का कंटैंट तब तक दिखाई न देगा जब तक आप उन्हें ढूढेंगे नहीं.
अब ये सब प्लेटफौर्म देशों की सरकारों के आदेशों पर चलने लगे हैं. यह दुख की बात है कि दुनिया के अधिकांश देशों की जनता ने अपने हकों को मुफ्तखोरों के लालच में इन प्लेटफौर्मों के हाथों गिरवी रख दिया है. जनवरी के पहले सप्ताह में एक्स ने कहा है कि वह नरेंद्र मोदी की भारत सरकार की संस्था मैत्री का आदेश 72 घंटे में लागू कर देगा. यह जनता के हकों को उस माध्यम से कुचलना है जो घरघर पहुंच चुका है. Editorial





