Rahu Ketu Movie Review : बौलीवुड में भेड़चाल है. यदि एक फिल्मकार कौमेडी बनाता है और उस की फिल्म सफल हो जाती है तो उस की देखादेखी अन्य फिल्मकार भी कौमेडी फिल्में बनाने लगते हैं. नतीजा यह होता है कि किसीकिसी हफ्ते तो बहुत सी कौमेडी फिल्में रिलीज हो जाती हैं और दर्शकों का भेजा फ्राई होने लगता है कि क्या देखें क्या न देखें.

‘राहुकेतु’ भी एक बेतुकी और अटपटी कौमेडी फिल्म है जिसे 2026 के शुरू में ही रिलीज किया गया है. उसी के साथ, उसी हफ्ते कई और कौमेडी फिल्मों को भी रिलीज किया गया है. यानी, मुकाबला तगड़ा है.

राहुकेतु के बारे में हमारे धर्मशास्त्रों में बहुतकुछ लिखा हुआ है. इन दोनों को 8वां और 9वां गृह बताया गया है. अंधविश्वासों को मानने वाले राहुकेतु के बारे में व्याख्या करते हुए लिखते हैं कि राहु एक ऐसा सिर है जिस का कोई शरीर नहीं है. ये ग्रह अधूरी इच्छाओं को प्रकट करते हैं. इन्हें अशुभ ग्रह माना जाता है.

हिंदू धर्मग्रंथों में राहुकेतू को राक्षस बताया गया है. धर्मग्रंथों में यह भी बताया गया है कि इन की उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान शुरू हुई. इन्होंने धोखे से देवताओं का अमृत पी लिया था. अंधविश्वासी हिंदुओं के अंदर राहुकेतु भय पैदा करते हैं. ज्योतिषी अंधविश्वासी लोगों को राहुकेतु का भय दिखा कर उन की जेबें हलकी करते हैं जबकि राहुकेतु एक मिथ्या है.

हिंदू पौराणिक कथाओं पर आधारित कौमेडी बहुत कम देखने को मिली है, मगर निर्देशक ने 2 मूर्खों को ले कर इसे अटपटी कौमेडी के रूप में बनाया है. वरुण शर्मा को राहु बताया गया है और पुलकित सम्राट को केतु. दोनों ही राहुकेतु जैसे अशुभ हैं.

कहानी की शुरुआत चुरुलाल शर्मा (मनुऋषि चड्ढा) नामक एक लेखक की जादुई नोटबुक से होती है. इस नोटबुक से 2 किरदार राहु और केतु असल जिंदगी में आ जाते हैं. इन का मकसद भ्रष्टाचार से लड़ऩा है लेकिन वे खुद मुसीबतों में फंस जाते हैं. मीनू टैक्सी नाम की एक युवती उस जादुई नोटबुक को चुरा लेती है और राहुकेतु को अपने इशारों पर नचाने लगती है. वह उन का भाग्य तय करती है. राहु और केतु को ड्रगमाफिया से लड़ कर इसे वापस लाना है. इस दौरान वे अपनी शक्तियों को पहचानते हैं और अपने बारे में सचाई पता लगाते हैं.

उन की खोज उन्हें ड्रग माफिया के जाल में ले जाती है जहां उन्हें अपराधियों और भाग्य दोनों को मात देनी पड़ती है. आखिरकार राहु और केतु सभी बाधाओं को पार करते हुए मीनू टैक्सी से नोटबुक वापस ले कर अपने भाग्य का नियंत्रण अपने हाथ में ले लेते हैं और अपनी कहानी को फिर से लिखते हैं.

यह कौमेडी एकदम नीरस है और उलझी हुई है. इसे देखने जाने से पहले दिमाग को घर पर रख कर जाना पड़ेगा. निर्देशक ने फिल्म ‘फुकरे’ में आए वरुण शर्मा और सम्राट पुलकित को रिपीट किया है. दोनों मंदबुद्धि दोस्तों की भूमिका में हैं. दोनों कलाकारों की जुगलबंदी ध्यान खींचती है.

फिल्म में कुछ कमियां रह गई हैं. मध्यांतर के बाद वाला हिस्सा लंबा और बिखरा हुआ है. विजुअल्स अच्छे हैं. बैकग्राउंड म्यूजिक और गाने कहानी की रफ्तार को बनाए रखते हैं. संपादन में कसावट की कमी है. चुटकुले दर्शकों पर असर नहीं छोड़ पाते.

वरुण शर्मा ने राहु के किरदार में कौमेडी से एक बार फिर दर्शकों का दिल जीत लिया है. वहीं पुलकित सम्राट के अभिनय में गहराई है. मीनू टैक्सी के रूम में शालिनी पांडे ने अपने चुलबुल अंदाज से नई ऊर्जा भरी है. फिल्म का क्लाइमैक्स चौंकाता है. सिनेमेटोग्राफी अच्छी है. Rahu Ketu Movie Review

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