Palak Paneer Controversy USA : आज अमेरिका दुनिया में सुपरपावर है. अमेरिका की इकोनौमी और डिफेंस दुनिया में सब से मजबूत हैं लेकिन सिर्फ अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत की बदौलत ही अमेरिका महाशक्ति नहीं बना है. अमेरिका में पिछले 250 सालों में डेमोक्रेसी मजबूत बनी रही इसलिए अमेरिका ताकतवर बन पाया हालांकि यह अलग बात है की अब डोनाल्ड ट्रंप इस मजबूत लोकतंत्र को खोखला करने पर तुले हैं. डेमोक्रेसी की बुनियाद न्याय पर टिकी होती है. अमेरिका की न्याय व्यवस्था भी दुनिया में सब से मजबूत है. इस बात के उदाहरण समयसमय पर अमेरिकी अदालतें पेश करती रहती हैं.
2023 में अमेरिका के कोलोराडो बोल्डर यूनिवर्सिटी में 34 साल के आदित्य प्रकाश और 35 वर्षीय उर्मी भट्टाचार्य सेकंड ईयर में पढ़ाई कर रहे थे. दोनों ने पीएचडी की डिग्री हासिल करने के लिए कालेज में दाखिला लिया था. 5 सितंबर 2023 को प्रकाश यूनिवर्सिटी के ओवन में अपना लंच गर्म करने पहुंचा. प्रकाश के टिफिन में पालक पनीर की सब्जी थी. ऐसे में यूनिवर्सिटी की स्टाफ ने उन्हें सब्जी गर्म करने से मना कर दिया. स्टाफ का कहना था कि सब्जी से अजीब सी स्मेल आ रही है इसलिए इसे ओवन में गर्म नहीं किया जा सकता है.
मामला बढ़ा तो इस इंडियन कपल ने यूनिवर्सिटी पर भेदभाव का आरोप लगाया. दोनों को सीनियर्स के साथ कई बार मीटिंग में बुलाया गया. बिना कारण बताए दोनों को यूनिवर्सिटी ने पीएचडी की डिग्री देने से इनकार कर दिया. प्रकाश और उर्मी ने कोलाराडो की जिला न्यायालय का दरवाजा खटखटाया. दोनों ने यूनिवर्सिटी पर आरोप लगाया कि पनीर की सब्जी पकाने के कारण यूनिवर्सिटी ने डिग्री देने से मना कर दिया.
अदालत ने कालेज को आदेश दिया की वे प्रकाश और उर्मी की डिग्री जारी करे और दोनों को 2 लाख डौलर मुआवजा भी दे. कालेज ने दोनों को पीएचडी की डिग्री तो देदी लेकिन प्रकाश और उर्मी को हमेशा के लिए बैन कर दिया. अब वे न इस कालेज में दाखिला ले सकेंगे और न ही नौकरी कर सकेंगे.
इस मामले पर इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए प्रकाश ने कहा “मेरा खाना मेरा गर्व है. कोई और तय नहीं करेगा कि वह खुशबूदार है या बदबूदार. अजीब खुशबू की वजह से कालेज का अमेरिकी स्टाफ ओवन में ब्रोकली भी गर्म नहीं करने देते हैं. ब्रोकली खाने की वजह से कितने ही भारतीय लोगों को भेदभाव का सामना करना पड़ता है?”
प्रकाश और उर्मि को अपने तरीके से खाना खाने की पूरी आजादी है लेकिन अगर कालेज के अमेरिकी स्टाफ को उस खाने की आदत नहीं है और उन्हें उस खाने की गंध पसंद नहीं तो इस में गलत क्या है? हर जगह का खानपान और रहनसहन अलग होता है. किसी और देश में जा कर आप अपनी मर्जी नहीं चला सकते. किसी को आप की सब्जी पसंद नहीं तो इसे भेदभाव नहीं कहते हैं. भेदभाव वह होता है जो उर्मी भट्टाचार्य के अपने देश में जाति के नाम पर किया जाता है. कोई घोड़ी पर नहीं चढ़ सकता क्योंकी उस ने छोटी जात में जन्म लिया है. कोई निचली जात का आदमी कुर्सी पर नहीं बैठ सकता. जाति के नाम पर हिंसा और बलात्कार तक होते हैं.
ऊंचनीच के नाम पर हर कदम पर भेदभाव होता है और इस भेदभाव के लिए कहीं कोई मुआवजा नहीं मिलता. इसे असली भेदभाव कहते हैं जिसे प्रकाश और उर्मी भट्टाचार्य जैसे उच्च जातीय मानसिकता वाले लोग कभी नहीं समझ सकते.
अमेरिका की अदालत ने तो इतनी सी बात के लिए कोई भेदभाव किए बिना दो करोड़ का मुआवजा दिलवा दिया लेकिन भारत में उर्मी भट्टाचार्य जैसी मानसिकता वाले लोग तो सदियों से उत्पीड़न झेलने वाले एससी वर्ग को मिले आरक्षण के भी खिलाफ होते हैं. Palak Paneer Controversy USA :





