Ekaki Movie : इन्फ्लुएंसर आशीष चंचलानी ने ओटीटी पर अपनी वैब सीरीज ‘एकाकी’ को रिलीज न कर सीधे यूट्यूब पर फ्री में जारी कर दिया है. ऐसा पहले टीवीएफ भी कर चुका है मगर अंत में उसे बड़े ओटीटी प्लेटफौर्म की तरफ जाना पड़ा. अब ‘एकाकी’ का क्या होगा?

इन्फ्लुएंसर आशीष चंचलानी को कौन नहीं जानता. यूट्यूब वीडियो से नाम कमा कर वह अब मूवी व वैब सीरीज में भी दिखने लगा है. कभी मोटा दिखने के चलते ट्रोल हुआ आशीष अपने फिजिकल ट्रांसफौर्मेशन के लिए भी काफी चर्चा में रहा.

म्यूजिक वीडियो बनाने के बाद अब उस की एक सीरीज आई है ‘एकाकी’ नाम से. इस का ख़ास कहीं जिक्र नहीं हुआ. दरअसल, सोशल मीडिया क्रिएटर की जर्नी का पीक पौइंट अगर किसी को जाननासमझना हो तो भुवन बाम, आशीष चंचलानी या मुनव्वर फारूकी जैसे नाम उदाहरण के तौर पर लिए जा सकते हैं.

आशीष से पहले भुवन बाम और मुनव्वर भी अपनी सीरीज ले कर आ चुके हैं. आशीष भी उसी जुगत में है कि कैसे भी कर के वह फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बना पाए. मगर यह रास्ता आसान नहीं. इस पर सिद्धार्थ अरोड़ा सहर ने अपनी टिप्पणी दी है.

सिद्धार्थ ने आशीष की नई सीरीज को ले कर फेसबुक पर कहा, “कोई लेखक, निर्देशक, गायक, गीतकार, संगीतकार या कोई कलाकार, अगर अपने हुनर से पैसा कमाना चाहे तो उसे किसी न किसी के नीचे रह कर, उस की मरजी और उस के मूड के अनुसार काम करना पड़ता है. लेखकों को लगता है कि ऐक्टर मजे में है, ऐक्टर सोचता है डायरैक्टर की मौज है और डायरैक्टर को लगता है कि प्रोड्यूसर की ऐश है.

“पर हक़ीकतन एकएक शख्स दूसरे पर निर्भर है. लेखक कुछ भी लिख दे, जाएगा तो वही जो डायरैक्टर को समझ आएगा, उसे समझ नहीं आया तो फिर कितनी ही सुंदर बात लिखी हो, व्यर्थ है. डायरैक्टर और प्रोड्यूसर्स भी स्टूडियो पर, ओटीटी प्लेटफौर्म पर डिपैंड हैं. वहीं मैं आशीष चंचलानी और इन के जैसे यूट्यूबर्स को देखता हूं तो इन में अपनी आज़ादी भी दिखती है.”

दरअसल सिद्धार्थ आशीष चंचलानी के किसी ओटीटी प्लेटफौर्म पर अपनी सीरीज को न रिलीज किए जाने की बात कर रहे हैं. आशीष ने अपनी सीरीज अपने यूट्यूब चैनल पर रिलीज की है, जिस का एक एपिसोड अभी, 28 नवंबर, तक रिलीज किया गया है और 7.9 मिलियन यानी तकरीबन 79 लाख लोगों ने इसे देख लिया है.

सिद्धार्थ आगे कहते हैं, “लंबे समय से निर्मित ‘एकाकी’ नाम से वैब सीरीज़ आखिरकार अब यूट्यूब पर स्ट्रीम हो गई है. पहले यह फ़िल्म थी, अब सीरीज़ में कन्वर्ट कर दिया गया है इसे. इस को देखने के लिए किसी सब्सक्रिप्शन का लफड़ा नहीं है. इस के प्रोड्यूसर, डायरैक्टर, राइटर और लीड ऐक्टर सबकुछ आशीष ही हैं. मुझे अंदाज़ा है कि 8 एपिसोड भी हों तो एक सीरीज़ बनाने में कितना खर्च आ सकता है. आशीष ने तो प्रोडक्शन वैल्यू में कोई कमी भी नहीं छोड़ी है. फिर भी उन्होंने किसी ओटीटी प्लेटफौर्म को अपनी सीरीज बेच कर चैन की नींद सोने के बजाय डायरैक्ट पब्लिक डोमैन पर फ्री में डालना बेहतर समझा.”

देखा जाए तो आशीष के समकक्ष बाकी इन्फ्लुएंसर ने किसी न किसी तरह से अपनी सीरीज को ओटीटी प्लेटफौर्म पर बेचा है, जैसे भुवन बाम की सीरीज ‘ताजा खबर’ के राइट्स हौटस्टार के पास हैं. वहीं मुन्नवर फारूकी की सीरीज ‘फर्स्ट कौपी’ एमएक्स प्लेयर पर है.

सिद्धार्थ आगे कहते हैं कि आशीष चंचलानी को प्रतिदिन अपनी सीरीज बनाने में मिनिमम खर्च भी ले कर चलें तो भी 10 लाख रुपए आता है. मतलब 50 दिन का मान कर चलें तो 5 करोड़ की लागत तो कम से कम है. व कहते हैं, “अब आप सोचिए, क्या यूट्यूब पर एक सीरीज़ से 5 करोड़ रुपए निकालना आसान है? अगर 3 डौलर आरपीएम भी मिल गया तो हरेक मिलियन व्यूज़ पर 3,000 डौलर्स के आसपास बनेंगे. अब तक 8 घंटे में 4 मिलियन से ज़्यादा व्यूज हो चुके हैं, यानी कम से कम 12,000 डौलर्स का रेवेन्यू बना होगा जो रुपए में 11 लाख के आसपास है.”

इस का मतलब आशीष को सिर्फ पैसे निकालने के लिए 5 लाख डौलर्स की ज़रूरत पड़ेगी, जिस के लिए इस पूरी सीरीज़ पर 180 मिलियन व्यूज़ जाने चाहिए.

सिद्धार्थ सोशल मीडिया और फिल्मों पर अपनी टिप्पणियां करते हैं. वे मोटामोटा हिसाब लगाते हैं कि आशीष का सीरीज को यूट्यूब पर रिलीज करना रिस्की मामला है मगर आशीष ने रिस्क लिया तो वे उस आजादी को भी भोग रहे हैं जो ओटीटी पर बेच कर बाकी क्रिएटर नहीं भोग पाते.

इस में कोई शक नहीं. मगर क्रिएटिव आजादी पैसों के नुकसान पहुंचाने के आधार पर जस्टिफाई नहीं हो पाती. बेशक आशीष ने यूट्यूब पर जाने का फैसला किया वो भी फ्री में दिखाने के, इस से व्यू ही मिल पाएंगे, जो उन के 3 करोड़ फौलोअर्स से खर्चा वसूली संभव नहीं, तब जब मुफ्त में कंटैंट यहांवहां पड़ा हो और फिल्म इंडस्ट्री के लोग लगभग मुफ्त में अपनी फ़िल्में दिखा रहे हों.

देखना यह है कि आशीष का यह मौडल कितना सफल होता है. Ekaki Movie :

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