‘‘ममा, आप की चिट्ठी,’’ बेटे ने डाक देखते हुए कहा.

‘‘चिट्ठी? आजकल तो डाक के नाम पर बिजली, टैलीफोन का बिल या कोई औफिशियल लैटर ही होता है. मोबाइल और ईमेल के जमाने में चिट्ठी लिखने की फुरसत ही किसे है?’’

‘‘हां, देखिए तो, पता हिंदी में लिखा है...’’ मानो चिट्ठी के साथ ही हिंदी में लिखा पता भी एक अजूबा ही हो.

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