गांवभर की औरतें टूटिया खेल रही थीं. दुलहन बनी बसंती भाभी ने दूल्हा बनी रेखा को अपनी इच्छा के अनुसार सजाया था. पर कुछ पल के दूल्हे ने सुहागरात की रस्म पर ऐसा क्या कह दिया कि दुलहन की पलकें भीग गईं.

मालवा के विवाह के अवसर पर एक बड़ी मनोरंजक रस्म अदा होती है. बरात के रवाना हो जाने के बाद वर के घर पर रतजगा होता है. महल्ले व नातेरिश्ते की सभी स्त्रियां उस रात वर के घर पर इकट्ठी होती हैं और फिर जागरण की उस बेला में विवाह की सारी रस्में पूरे विधिविधान से संपन्न की जाती हैं. कोई स्त्री वर का स्वांग भरती है तो कोई वधू का.

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