Family Story : ‘‘शादी हुई नहीं कि बेटा पराया हो जाता है,’’ माया किसी से फोन पर कह रही थीं, ‘‘दीप की शादी हुए अभी तो केवल 15 दिन ही हुए हैं और अभी से उस में इतना बदलाव आ गया है. पलक के सिवा उसे न कोई दिखाई देता है, न ही कुछ सूझता है. ठीक है कि पत्नी के साथ वह ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताना चाहता है, पर मां की उपेक्षा करना क्या ठीक है.’’ यह सुन कर दीप हैरान रह गया. उस ने अनुमान लगाया कि फोन के दूसरी तरफ सोमा बूआ ही होंगी. वही हैं जो इस तरह की बातों को शह देती हैं. वह भी तो हमेशा अपने बेटेबहू को ले कर नाराज रहती हैं. सब जानते हैं कि सोमा बूआ की किसी से नहीं बनती. वे तो सभी से परेशान रहती हैं और दूरपास का कोई ऐसा रिश्तेदार नहीं है जो उन के व्यंग्यबाणों का शिकार न हुआ हो. अपने बेटे को तो वे सब के सामने जोरू का गुलाम तक कहने से नहीं चूकती हैं. पर मां, उस के बारे में ऐसा सोचती हैं, यह बात उसे भीतर तक झकझोर गई. घर में और तो किसी ने ऐसा कुछ नहीं कहा, तो मां को ऐसा क्यों लग रहा है. पापा, उस की बहन दीपा, किसी ने भी तो ऐसा कुछ जाहिर नहीं किया है जिस से लगे कि वह शादी के बाद बदल गया है. फिर मां को ही क्यों लग रहा है कि वह बदल गया है.

पलक को इस समय नए घर में एडजस्ट होने में उस का सहयोग और साथ चाहिए और वही वह उसे दे रहा है तो इस से क्या वह मां के लिए पराया हो गया है. पलक के लिए यह घर नया है, यहां के तौरतरीके, रहनसहन सीखनेसमझने में उसे समय तो लगेगा ही और अगर वह यहां के अनुरूप नहीं ढलेगी तो क्या मां नाराज नहीं होंगी. आखिर मां क्यों नहीं समझ पा रही हैं कि पलक के लिए नए माहौल में ढल पाना सहज नहीं है. इस के लिए उसे पूरी तरह से अपने को बदलना होगा और वह चाहती है कि इस घर को जल्दी से जल्दी अपना बना लें ताकि सारी असहजता खत्म हो जाए. वह पूरी कोशिश कर रही है, पर मां का असहयोग उसे विचलित कर देता है. दीप खुद हैरान था मां के व्यवहार को देख कर. मां तो ऐसी नहीं हैं, फिर पलक के प्रति वे कटु कैसे हो गई हैं.

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