औरत के बल पर मर्द अपना कद ऊंचा रख सकता है. राहुल आज संतुष्ट जीवन जी रहा था तो अपनी पत्नी के कारण ही. संबल ने ही उसे जीने की नईर् राह सुझाई थी.

अपने मैरिजहोम के स्वागतकक्ष में बैठी नमिता मुख्य रसोइए से शाम को होने वाले एक विवाह की दावत के बारे में बातचीत कर रही थी, तभी राहुल उस के कमरे में आया. नमिता को स्वागतकक्ष में देख कर एक बार को वह ठिठक सा गया, ‘‘अरे, नमिता, तुम यहां?’’ निगाहों में ही नहीं, उस के स्वर में भी आश्चर्य था.

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