गुजरात जल रहा था. राजधानी अहमदाबाद की स्थिति और खतरनाक हो चुकी थी. हर  महल्ले की तंग गलियों में मारकाट, खूनखराबा मचा हुआ था. आदमी कहलाने वाले चेहरे हिंसक दरिंदे बन गए थे, जीवन उदास हो रहा था और मृत्यु तांडव कर रही थी.
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