वैसे तो कशिश को मम्मी की सभी सहेलियां पसंद थीं लेकिन मधुलिका आंटी की कुछ बात ही अलग थी. यद्यपि आते ही गले मिलने और हालचाल पूछने के बाद वह एक तरह से कशिश की ओर से तटस्थ हो जाती थीं फिर भी जब तक वह घर में रहती थीं उसे पूरे घर में जैसे अपनेपन की ऊष्मता महसूस होती थी.

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