अम्मां के होते कितनी बेफिक्री थी. घर सुरक्षित था. बच्चों को दादी का दुलार मिल रहा था. नीरा बेफिक्र हो कर स्कूल चली जाती. सब से बड़ी बात-बड़ों की जिंदगी का अनुभव कितनी समस्याओं को सुलझा देता है. लेकिन आज अम्मां वृद्धाश्रम में थीं. क्या वृद्धाश्रम से वापस घर आना उन्हें मंजूर हुआ?

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