Editorial : दिल्ली में बड़े धूमधड़ाके से एआई समिट का आयोजन किया गया. चर्चा में जो बातें ज्यादा रहीं वे थीं अव्यवस्था, चोरियां, विदेशी सामान पर देशी बिल्ला लगा कर दर्शाना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वजह से समिट में लगे स्टौलों को पूरे 3 घंटे बंद कर देना.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मुंबई के मैरीन ड्राइव पर जौगिंग करने के लिए बिना ताम?ाम के निकल सकते हैं जबकि प्रधानमंत्री मोदी अपनी जनता से भयभीत हैं, उन्होंने अपनी विजिट के दौरान स्टौल लगाने के लिए आने वालों को भी हटवा दिया. केवल कैमरे के सामने आने वाले स्टौल लगाने वाले ही आने दिए गए.
असल में वैज्ञानिकता तार्किकता से आती है और जो देश गले तक पाखंडों में डूबा हो, जहां सरकार राम मंदिर के विकास और नए संसद भवन के उद्घाटन तक पर भगवाधारी अनपढ़ स्वामियों के जमावड़े पर ज्यादा भरोसा करती हो वहां विज्ञान केवल टोकन बन कर रह जाएगा.
भारत में तर्क की कोई गुंजाइश नहीं है. संसद की बहसों में देख लें. आज 2026 में सांसदों में जब बहस होती है तो वर्तमान तथ्य और तर्कों की जगह सत्ता पक्ष केवल नेहरू, इंदिरा, राजीव के नाम लेते दिखते हैं और कुतर्क का इस्तेमाल कर के दूसरों को बोलने से रोकते हैं. संसद भवन कैमरों, रिमोट माइकों से लदा पड़ा है लेकिन इन सब का उपयोग केवल विपक्ष का मुंह बंद करने के लिए हो रहा है.
नई दिल्ली स्थित भारतीय मंडपम जहां एआई समिट हुई, वहां चारों ओर बुरी तरह अफरातफरी मची रही. एआई तो क्या, आसपास की सड़कों पर ट्रैफिक लाइटें तक सुव्यवस्थित नहीं थीं. मंडपम में बिछे कारपेट मुड़ रहे थे, तार बिखरे हुए थे, स्टौलों के पार्टीशन खंभे गिर रहे थे. कहीं से ऐसा नहीं लग रहा था कि यह एक विकसित देश की जमीन पर टैक्नोलौजी के आज के नए अवतार एआई यानी आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस को जज्ब कर लिया गया है.
आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
डिजिटल
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
- 24 प्रिंट मैगजीन





