आत्महत्या! यह शब्द अपनेआपमें आतंक पैदा करने वाला है. प्रत्युषा बनर्जी की असामयिक मौत निसंदेह बड़ी दुखद है. आखिर क्यों होती है आत्महत्या की घटनाएं  कोलकाता की जानीमानी मनोचिकित्सक प्रथमा चौधुरी कहती हैं कि किसी-किसी इंसान में आत्महत्या की प्रवृति होती है. ऐसे लोग बार-बार आत्महत्या की कोशिश करते हैं. किसी कमजोर पल में जीवन से वितृष्णा का एहसास हो सकता है और तब मन में आत्महत्या का ख्याल भी आ सकता है. तब वे ये नहीं सोचते कि उनके इस फैसले से उनके करीबी परिजनों पर क्या-कुछ गुजरेगी!

आत्महत्या को रोकने के सिलसिले प्रथमा चौधुरी निम्न सुझाव दे रही हैं:

·       अगर किसी के मन में ऐसा ख्याल आए तो उसे तुरंत मनोचिकित्सक की सलाह लेना चाहिए.

·       जीवन के प्रति जब कभी वितृष्णा या निराशा महसूस हो तो सबसे पहले एक ‘सेफ्टी प्लान’ तैयार कर लेना बहुत जरूरी है. जिनको शरीर में हमेशा क्रोनिक पेन की शिकायत रहती है, ऐसे कुछ लोगों में कभी-कभी आत्महत्या की प्रवृति को हावी होते पाया गया है. इसीलिए शरीर का किसी भी हिस्से में अक्सर दर्द रहता है तो उसका इलाज करवाना चाहिए

·       करीबी परिजनों और मित्रों से दिल की बात करके मन को हल्का कर लेना चाहिए. अपनी दुविधा को शेयर करना चाहिए. हो सकता है वह आपके लिए मदद साबित हो. किसी कठिन परिस्थिति से बाहर निकलने में सहायक हो.

·       जहां तक संभव हो अकेले रहने से बचना चाहिए. किसी भरोसेमंद मित्र या करीबी परिजन के साथ ज्यादा से ज्यादा समय गुजारना चाहिए.

·       परिजनों को भी चाहिए कि जब कभी इस बात का एहसास हो कि उनके परिवार का कोई सदस्य मन से कमजोर पड़ रहा है, निराशा से घिरा है, गहरी उदासी में है तो उसे भरसक कोशिश करके अकेला न छोड़े.

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