किन्नर समाज हिंदू धर्म के अंधविश्वास का शिकार है. इसी के चलते यह समाज की मुख्यधारा में शामिल नहीं हो पाता है. सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि खुद किन्नर अंधविश्वास को अपनी कमाई का जरीया बनाते हैं. रूढि़वादी रीतिरिवाजों जैसे शादी, बेटा या बेटी का जन्म, गृह प्रवेश जैसे आयोजनों की आड़ में वे मोटा दान लेते हैं. दान को अपना हक समझते हुए वे कई बार जोरजबरदस्ती करने लगते हैं, जिस की वजह से आपराधिक वारदातें भी घट जाती हैं.

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