History Revelation : चंगेज खान की क्रूरता के बारे में बहुत कुछ लिखा जा चुका है. दुनिया उसे एक ऐसे क्रूर और बेरहम कातिल के रूप में याद करती है जिस ने चीन से लेकर भारत तक खून की नदियां बहा दी थी. इतिहास के किसी भी विजेता के दो इतिहास होते हैं एक इतिहास वो जो उस के मुल्क में लिखा गया होता है. दूसरा इतिहास वो जिसे उस के द्वारा जीते गए मुल्कों ने लिखा होता है. एक जगह जो हीरो होता तो दूसरा इतिहास उसे विलेन साबित करने की कोशिश करता है. गजनवी, गौरी, बाबर, तैमूर और नादिरशाह यह सभी आक्रांता हमारे लिए बेशक विलेन हैं लेकिन इनके अपने देश में ये सभी हीरो हैं. हमारे पास इन के विलेन होने की सैंकड़ों कहानियां हैं तो अपने इलाके में इनके हीरो होने की सैंकड़ों दास्तानें मौजूद हैं.
इस में कोई शक नहीं की दुनिया के लिए चंगेज खान एक निहायत ही क्रूर व्यक्ति था लेकिन मंगोलिया के लिए आज भी वह नायक ही है. चंगेज खान की तुलना हिटलर से नहीं हो सकती. जरमनी के लोग हिटलर को मसीहा नहीं मानते इसलिए जर्मनी में हिटलर की कोई प्रतिमा मौजूद नहीं है लेकिन मंगोलिया में चंगेज खान की सैंकड़ों फिट ऊंची मूर्ति खड़ी है. चंगेज खान आज भी मंगोलियन लोगों के दिलों पर राज करता है. पूरी दुनिया के साथ ही जरमनी के लिए भी हिटलर विलेन है लेकिन मंगोलिया के लिए चंगेज खान लीजेंड ही है.
चंगेज खान ने शहर के शहर तबाह किए थे. लाशों के मीनार खड़े कर दिए थे. लाखों बस्तियां उजाड़ दी थीं लेकिन यह तो उस काल खंड के हर कबीले के लिए अपना आस्तित्व बचाए और बनाए रखने की मजबूरी का नतीजा था. कबीलों का वजूद मरो या मारो के सिद्धांतों से चलता था. अपने कबीले के आस्तित्व को बनाए रखने के लिए उस दौर में लड़ना जरूरी था. जो जीतेगा वही जिएगा यह इंसानी समूहों के "सर्वाइवल ऑफ फिटेस्ट" की सबसे क्रूर अवस्था का दौर था.
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