शिक्षा के जरिए ही समाज में हर तरह का बदलाव आ सकता है. अंधविश्वास, रूढि़वादिता, भेदभाव, छुआछूत वहीं सब से ज्यादा है जहां शिक्षा का अभाव है. अपने हक और अधिकार के लिए जरूरी है कि आप शिक्षित हों. सरकारी स्कूलों का ढांचा इतना अच्छा नहीं है कि वे समाज के हर जरूरतमंद को शिक्षा दे सकें. कुछ वर्षों पहले तक की बात करें तो सरकारी स्कूलों में अंगरेजी की शिक्षा कक्षा 6 से दी जाती थी. जबकि मिशनरी स्कूलों में कक्षा 1 से ही अंगरेजी की पढ़ाई शुरू हो जाती थी.

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