दुनियाभर में बाल मजदूरी के खिलाफ अलख जगाने वाले भारत के कैलाश सत्यार्थी और लड़कियों की तालीम के लिए संघर्ष करने वाली पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई को संयुक्त रूप से शांति का नोबेल पुरस्कार दिए जाने के बाद भारतीय उपमहाद्वीप में खुशी का माहौल है. नोबेल पुरस्कार के बावजूद क्षेत्र में न तो शांति का वातावरण है, न ही शिक्षा की राह की अड़चनों में कमी आने की संभावना दिखाई दे रही है. शांति का नोबेल मिलने के बाद इस क्षेत्र में मजहबी हिंसा, मारकाट और आतंकवाद का खौफ घटा नहीं है यानी अशांति कायम है.

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