सवाल
मैं जिस युवक से प्यार करती हूं उसी से शादी करना चाहती हूं, वह भी मुझ से शादी करना चाहता है, लेकिन वह अपने घर वालों से डरता है. मैं उस से बस, यही कहना चाहती हूं कि मेरे पास इतना टाइम नहीं है कि मैं 3-4 साल तक इंतजार करूं. मेरी मदद कीजिए?

जवाब
प्यार किया तो फिर डरना कैसा. अगर आप जिसे चाहती हैं वह भी आप से शादी करना चाहता है तो फिर पेरैंट्स को बताने का डर कैसा.

और रही बात कि आप 3-4 साल नहीं रुक सकतीं तो उसे स्पष्ट बता दें कि आप उस से सच्चा प्यार करती हैं जिस वजह से आप उसे छोड़ना नहीं चाहतीं, लेकिन साथ ही साथ अपने पेरैंट्स की फीलिंग्स को भी हर्ट न करें.

ऐसे में समय रहते डिसीजन लेना जरूरी है. अगर फिर भी वह टालमटोल करे तो आप अपनी जिंदगी को अपने हिसाब से आगे बढ़ाइए वरना उस का इंतजार करना आप को भारी पड़ सकता है.

ये भी पढ़ें…

रिश्तों और प्यार पर चोट करता पैसा

पैसा कमाने के लिए लोग अपने परिवार को छोड़ कर बाहर दूसरी जगह भी जाते हैं. कहावत है कि बाप बड़ा न भैया सब से बड़ा रुपैया. पैसा एक ऐसी चाह है जिस के पास ज्यादा हो वह परेशान, जिस के पास कम हो उसे अधिक पाने की लालसा. यही लालसा परिवार और समाज पर भारी पड़ती है. पैसे को ले कर अकसर रिश्तों में दरार आ जाती है.

कभीकभी पैसा ऐसा विवाद बन जाता है जो समाज में रिश्तों को शर्मिंदगी की ओर ढकेलता है, अपनों के बीच खींचातानी, परिवार में लड़ाईझगड़े, मारपीट आदि. यहां तक कि लोग अपनों का खून बहाने में जरा सा भी परहेज नहीं करते हैं. कहा जाता है कि दुनिया में 3 चीजें हैं जो अपनों को आपस में लड़ा देती हैं-जर, जोरू और जमीन. ये ऐसी चीजें हैं जिन से एक हंसताखेलता परिवार बर्बादी की कगार पर पहुंच जाता है.

अगर सब ठीक न रहा तो रिश्तों की मिठास में ये चीजें जहर का काम करती हैं. इंसान की प्रवृत्ति में बराबरी की चाह सब से खतरनाक बीमारी है. जब लोगों के जेहन में यह चाह बैठ जाती है तो फिर परिवार और रिश्तों में नया मोड़ आता है. वह मोड़ आपसी कलह और विवाद का होता है. एक बार जब आपसी मतभेद शुरू हो जाते हैं तो परिवार के हालात को सुधारना काफी मुश्किल होता है. ऐसे में पारिवारिक रिश्तों को समझना जरूरी होता है. कई परिवारों को सिर्फ पैसे के विवाद को ले कर टूटते देखा गया है. पैसे के विवाद को ले कर अकसर अखबारों और खबरिया चैनलों में खबरें आती हैं, कहीं भाई ने भाई को मारा तो कहीं पुत्र ने पिता को. लोग पैसे को ले कर क्या अपने, क्या पराए का खून बहाने में जरा सा संकोच नहीं करते. पारिवारिक रिश्ते को चलाने और निभाने के लिए दिल में बहुत सहनशक्ति होनी चाहिए.

रिश्तों में मधुरता जरूरी

हर रिश्ता कच्चे रेशम की डोर से बंधा होता है. अगर वह टूट जाता है तो आसानी से जुड़ता नहीं है. जुड़ता भी है तो दिल में एक गांठ जरूर पड़ जाती है. समाज में जितना जरूरी पैसा है उस से कहीं ज्यादा जरूरी रिश्ते को माना जाता है. यह सच है कि पैसा सब की जरूरत है. लेकिन आप के पास बहुत पैसा हो और परिवार की खुशी न हो तो कहीं न कहीं आप हमेशा अधूरे से रहेंगे. पैसा हमेशा न टिकने वाला होता है लेकिन संबंध समाज में हमेशा सुखदुख में काम आने वाले होते हैं. इसलिए पैसे को महत्त्व न दे कर अगर रिश्तों में मधुरता लाने की कोशिश की जाए तो इस विवाद को कम किया जा सकता है.

जलन की भावना

पैसे का विवाद अधिकतर एकदूसरे से जलन की भावना से शुरू होता है. परिवार हो या पड़ोसी, अगर आप के अंदर इस कुंठा ने जन्म ले लिया है तो मनमुटाव होना लाजिमी है. परिवार में सभी लोग बराबरी में नहीं रह सकते. किसी को अच्छी नौकरी, तो किसी को खानेकमाने भर की. जो खानेकमाने भर की नौकरी करता है उसे अच्छी नौकरी की तलाश करनी चाहिए न कि अच्छी नौकरी करने वाले को ले कर अपना मन कुंठित करे. ऐसा करने से केवल एकदूसरे के प्रति दूरियां बढ़ने के सिवा कुछ नहीं मिलता, आपसी रिश्तों में मनमुटाव शुरू हो जाता है जो आगे चल कर एक विवाद का रूप ले लेता है.

महत्त्वाकांक्षाओं पर काबू

हम अपने आसपास अगर पैसे के विवाद को देखते हैं तो उस में से एक बात जरूर सामने आती है, मनुष्य की बढ़ती हुई आकांक्षा. फलां व्यक्ति के पास यह चीज है, मेरे पास नहीं है. या फिर हमारे भाई के पास है तो मेरे पास क्यों नहीं. सीधी सी बात है, जितनी चादर उतने पैर फैलाओ. मान लो, अगर आप के परिवार में किसी के पास कार है तो वक्तजरूरत आप के काम आएगी. इसी में खुश रहना चाहिए और अगर आप उस लायक नहीं हैं तो आप को इस सोच से जीना चाहिए कि मेरे पास भले न हो लेकिन मेरे घरपरिवार में तो उपलब्ध है.

आपसी मनमुटाव

अगर परिवार में पैसे को ले कर आपसी मनमुटाव चल रहा है तो परिवार के साथ बैठ कर बातचीत करें. अकसर देखा जाता है कि घरपरिवार की बातें जब बाहर निकल कर जाती हैं तो वे एक प्रकार से ऐसी बीमारी बन जाती हैं जो दीमक की तरह खोखला करने का काम करती हैं. उस का कारण यह है कि घर की बातों पर घरफूंक तमाशा देखने वाले बहुत से लोग होते हैं. जब आप घर की बातों को किसी दूसरे से शेयर करते हैं तो उस बात पर मजे लेने वाले बहुत से लोग होते हैं जो कि परिवार को आपस में लड़वाने का काम अच्छे से जानते हैं.

अगर आप को परिवार में जमीन, पैसे को ले कर कोई समस्या है तो अपने घर में परिवार के सदस्यों के साथ बैठ कर हल करें जिस से आप अपने दिल की पूरी बात अपनों के सामने रख सकें और उस का निदान परिवार के लोग आसानी से निकाल सकें. इसलिए आपसी मनमुटाव का हल स्वयं करें. किसी बाहरी व्यक्ति को ज्यादा महत्त्व न दें.

सहनशक्ति की भावना

रिश्तों में सहनशक्ति की भावना होना बहुत जरूरी है. अगर आप के अंदर सहनशक्ति की भावना है तो आप किसी भी रिश्ते को अच्छे से निभा सकते हैं. पैसे, जमीन जैसे विवाद में सहनशक्ति की भावना होनी जरूरी है ताकि विवाद उत्पन्न होने की संभावनाएं कम रहें. ऐसी स्थिति में एकदूसरे को समझना बहुत जरूरी है, एकदूसरे की भावनाओं की कद्र करना जरूरी है. अगर परिवार का मुखिया अपने किसी लड़के को उस की मदद के लिए ज्यादा पैसा दे रहा है तो दूसरे लड़के को उस की परिस्थिति को देख कर अपनी बात रखनी चाहिए. कभीकभी देखा गया है कि हर तरह से संपन्न लड़का ऐसी बातों पर एतराज जताता है. एक घर की बात बताना चाहता हूं. 2 लड़कों में एक सरकारी नौकर है और एक के पास प्राइवेट नौकरी थी जो छूट गई है. मां को पैंशन मिलती है जिस से बेरोजगार लड़के का खर्च अभी चल रहा है. लेकिन सरकारी नौकरी करने वाले लड़के ने मां को हमेशा ताना दिया कि सारा पैसा अपने उस बेटे पर खर्च करती हो. स्थिति ऐसी आई कि जब उस की मां बीमार हुई तो उस लड़के ने कहा कि जिस के ऊपर पैसा खर्च किया, वह इलाज करवाए. आज वह मां दर्द से कराहती है और आंखों से आंसू बहते रहते हैं. सहनशक्ति न होना परिवार में विवाद खड़े करने के अलावा कोई दूसरा काम नहीं करता. ऐसे में परिवार में कलह होना स्वाभाविक है.

समझदारी से लें काम

समाज में रहते हुए अपने परिवार के प्रति हमेशा संवेदनशील रहना चाहिए. आप के ऊपर कोई परेशानी हो या खुशी, परिवार हमेशा आप के साथ खड़ा रहता है. ऐसे में पैसे को ले कर विवाद खड़ा कर आप अपनों से दूर हो सकते हैं. रिश्ते चाहे पारिवारिक हों, पड़ोसी या दोस्ती के, अधिकतर देखा जाता है कि उधार लिए गए पैसे चुका न पाने से विवाद खड़ा होता है जिस में फिर मारपीट, लड़ाईझगड़े होने लगते हैं.

ऐसे मामलों में लोग अपना आपा खो देते हैं और एक बड़े अपराध को जन्म दे डालते हैं. ऐसे हालात में लोगों को समझदारी से काम लेना चाहिए. उधार लेने वाले को भी और देने वाले को भी. लेने वाले को थोड़ाथोड़ा कर चुकाने का प्रयास करना चाहिए. उधार देने वाले को अपने अंदर थोड़ा संतोष रखना चाहिए. एक अच्छी समझदारी ही ऐसे विवादों को रोक सकती है.

ये भी पढ़ें- मेरे पति शहर में कौलगर्ल्स के साथ समय बिताते हैं, क्या करूं?

ये भी पढ़ें- मैं जिस लड़के से प्यार करती थी, उससे शादी नहीं हो पाई, वह अब भी मेरे पीछे पड़ा रहता है क्या करूं ?

Tags:
COMMENT