दूसरे दलों में तोड़फोड़ करना भाजपा के लिये सरल हो सकता है, पर दलबदल करने वाले नेताओं को संभालना भारी पड़ रहा है. उन्नाव के बहुचर्चित रेप और हत्या कांड में विधायक कुलदीप सेंगर की किरकिरी होने से विपक्ष भाजपा पर भारी पड़ गया है. पिछले कुछ सालों से भाजपा में अपने दल के ‘स्थापित नेताओं’ को दरकिनार किया जा रहा है. अपनी पार्टी के ‘स्थापित नेताओं’ की जगह दूसरे दलों के दलबदलू नेताओं को तरजीह दी जा रही है. यह भाजपा के गले की फांस बन रहे हैं.

COMMENT