बुशरा मनेका ठीक वैसे ही सौंदर्य की स्वामिनी हैं, जैसी 60 के दशक की भारतीय अभिनेत्रियां नरगिस और मधुबाला हुआ करती थीं. सांचे में ढला बदन, लंबी नाक, मासूम बोलता चेहरा, बड़ीबड़ी आंखें और पतली कमर पर झूलते बाल. इस के अलावा भी वह उन तमाम सौंदर्य के पैमानों पर खरी उतरती हैं, जो साहित्यकारों, दर्शनशास्त्रियों और विश्लेषकों ने गढ़ रखे हैं. बहुत संक्षिप्त में कहें, तो संगमरमर की मूर्ति या जीवित ताजमहल.

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