मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नया ऐलान यह किया है कि जल्द ही प्रदेश मे हैप्पीनेस मंत्रालय खोला जायेगा, जिसका काम लोगों को खुश करने के तौर तरीकों को बढ़ावा देना होगा. भाजपा की एक मीटिंग को सम्बोधित करते करते वे राजनीति की ज़मीन से छलाँग लगाते दर्शन शास्त्र के छज्जे पर चढ़े तो मानव दुखों पर व्याख्यान देने लगे कि हर कोई दुखी है. यहां तक कि मंत्री ओर मुख्य मंत्री भी सुखी और खुश नहीं हैं. फ़िर आम आदमी के दुखों की वजहों का तो अंत ही नहीं. इसलिये मध्य प्रदेश मे खुशी मंत्रालय खोला जायेगा, जो लोगों को खुश करने के तरीकों पर अमल करेगा.

मसलन जो लोग नॄत्य संगीत से खुश होते हैं उनके लिये नाच गाने के समारोह आयोजित किये जायेंगे, जिन्हे खेल से खुशी मिलती है उन्हे खिलाया जयेगा और मुद्दे की बात जिन्हे धर्म से खुशी मिलती है उनके लिये धार्मिक आयोजन किये जायेंगे, यानि किसी भी कीमत पर किसी को दुखी नहीं रहने दिया जयेगा. कभी बुद्ध भी मानव मात्र के दुख दूर करने आधी रात को पत्नी बच्चों को सोता छोड़ राज़ पाट त्याग कर खिसक लिये थे, पर शिवराज कुर्सी पर बैठे बैठे लोगों के दुख दूर करना चाहते हैं, तो कहा जा सकता है आइडिया बुरा नहीं, बशर्ते इसकी आड़ मे धर्म गुरुओं को रोजगार देने की उनकी मंशा न हो, नहीं तो खुश और सुखी रहने का एक मात्र उपाय इन्ही के पास है कि दक्षिणा चढ़ाओ और दुख भूल जाओ.

हैप्पीनेस मिनिस्ट्री शुरू करने का दूसरा पहलू यह स्वीकरोक्ति भी है कि लोग शिवराज के कार्यकाल से खुश नहीं हैं, इसलिये खुशी का उत्पादन वितरण और संचार सरकार खुद करे और सार रुप मे यह कहे कि दरअसल मे तुम जिसे दुख समझ रहे हो, वह दुख नहीं एक मानसिक अवस्था है, जिसका व्यवस्था से कोई लेना देना नहीं. इसलिये तुम इसी मे खुशी ढूँढ़ लो. पटवारी या कोई इंसपेक्टर घूस मांगे तो किल्पौ मत, खुशी खुशी दे दो, खाना नहीं है तो एक थाली की कल्पना करो, जो छप्पन व्यंजनों से सजी है, बच्चों को नौकरी नहीं मिल रही है तो परेशान मत हो, उल्टे खुश हो कि वे हम्माली करने से बचे हैं. मकान का तनाव ती बिल्कुल मत पालो क्योंकि पूरी दुनिया तुम्हारा घर है. लोकतंत्र मे प्रजा की इस हद तक चिंता आज कल कोई नेता नहीं करता सब के सब ज़मीन जायदाद बनाने और भाईयो व सालों को पैसा कमाने की खुली छूट दिये हुये भ्रष्टाचार मे लिप्त हैं. ऐसे मे शिवराज की यह पहल वाकई स्वागत योग्य है.

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