मेरे पिया गए रंगून, किया है वहां से टेलीफून...ये नज्म याद हैं. रंगून  यानी आज का बर्मा, आज से 50 साल पहले तक इसे काफी दूर माना जाता था. और लगभग हर भारतीय को पता था कि रंगून क्या है और कितनी दूर है. अमूमन भारतीय वहां आसानी से काम के सिलसिले में ज्यादा जाते थे. वर्ल्ड वार-2 के समय रंगून की भूमिका काफी अहम मानी जाती है. ब्रिटिश राज के लिए यह जापानी मोर्च को लेकर बड़ा सिरदर्द बना था. तो बस यहां की आबोहवा और इतिहास को देखते हुए विशाल भारद्वाज ने रंगून नाम से एक पीरियड रोमांस ड्रामा बनाई है.

फिल्म में उनके फेवरेट शाहिद कपूर लीड रोल में हैं. इससे पहले शाहिद कपूर विशाल भारद्वाज के साथ बैक-टू-बैक दो हिट फिल्में कमीने और हैदर दी हैं. इन दोनों फिल्मों में शाहिद कपूर की एक्टिंग को खूब सराहा गया. बकौल शाहिद कपूर वो किसी भी अन्य डायरेक्टर की अपेक्षा विशाल भारद्वाज के साथ ज्यादा कंफर्ट महसूस करते हैं. 

विशाल हमेशा से शाहिद को नए रूप में पेश करते हैं. शाहिद कपूर को विशाल की यही बात हमेशा से अच्छी लगती है. विशाल भी खुलकर शाहिद के साथ एक्पेरीमेंट करते रहते हैं. यही कारण है कि विशाल ने अपने करियर की सबसे महंगी फिल्म के लिए अदाकार शाहिद को चुना है. फिल्म की शूटिंग के दौरान शाहिद के घायल होने की हालत में विशाल भारद्वाज ने कई दिनों तक शूटिंग को रोका था. ये विशाल का बड़ा डिसीजन था. क्योंकि शूटिंग रोककर रखे रहना भारी आर्थिक नुकसान था. लेकिन अपने फेवरेट शाहिद के लिए भारद्वाज का दिल विशाल हो गया.

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