नीतीश कुमार ने इंसाफ के साथ तरक्की के नारे के बूते भले ही एक बार फिर बिहार की कमान थाम ली हो, पर गांवों में इंसाफ, ग्राम कचहरी, सरपंच और पंच तमाशा बन कर रह गए हैं. पंचायती राज के तहत बनाई गई ग्राम कचहरी का मकसद गांव वालों को गांव में ही इंसाफ दिलाना था, लेकिन पूरे 5 साल ग्राम कचहरियां ही इंसाफ के पेंच में फंसी रह गईं. सरपंचों और पंचों को हक और पद तो मिला, लेकिन वे दफ्तर, मेज, कुरसी और कलमकागज के लिए तरसते रह गए.

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