5 दिसम्बर को जब मध्यप्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू हुआ, तब सदन में आ रहे कई विधायकों के चेहरे पर दहशत थी, मानो मौत उनका पीछा कर रही हो. माहौल वाकई किसी डरावनी फिल्म या जासूसी उपन्यास के सस्पेंस सरीखा था, जिसमें एक के बाद एक मौतें हो रही हों और इनकी वजह किसी को समझ नहीं आ रही हो.

COMMENT