एक सप्ताह का समय बीत जाने के बाद भी उत्तर प्रदेश की विधानसभा में मिले विस्फोटक का राज पर्दे के बाहर नहीं आ पाया है. इससे समझा जा सकता है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था का क्या हाल है? ‘हाई सिक्योरिटी’ मामला होने के बाद भी जांच में यह पता पही चल पा रहा कि विस्फोटक किस तरह का है. जांच में एक दूसरे की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं. विधानसभा के मार्शल से लेकर देश में आतंकवाद के खिलाफ गठित हुआ सबसे भरोसेमंद एटीएस तक इस मामले की जांच में लगा है. इसके बाद भी कोई परिणाम सामने नहीं आ पा रहा है. जिम्मेदार अधिकारियों के अलग अलग बयान संदेह को जन्म दे रहे हैं. जिससे अब यह सवाल उठने लगा है कि कहीं विस्फोटक को लेकर सुरक्षा दस्ता गलत बयानी तो नहीं कर बैठा?

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