बीती 14 जनवरी को छत्तीगढ़ के पूर्व मुख्य मंत्री अजीत जोगी जब ट्रेन द्वारा रायपुर से बिलासपुर पहुंचे तो बेहद तमतमाए हुये थे. आक्रोश, ग्लानि, प्रतिशोध, क्षोभ और बेबसी जैसे दर्जनों साहित्यिक शब्द मनोभाव बनकर उनके चेहरे पर साफ पढ़े जा सकते थे, लेकिन उन्हे देख स्टेशन आए उनके समर्थकों ने अंदाजा लगा लिया कि इस बार दिल्ली मे बात नहीं बनी। वैसे भी सभी को मालूम था कि राहुल –सोनिया गांधी ने जोगी समर्थकों को खाली हाथ टरका दिया है ऐसे में जोगी के मुंह से कोई शुभ समाचार सुनने की उनकी ख़्वाहिश अधूरी रह गई.

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