संबंधों का वाकई कोई मूल्य नहीं होता. अनमोल रिश्तों और दोस्ती में पैसों का लेनदेन संवेदनशील बात है इसलिए इन्हें बनाए रखने के लिए जरूरी है कि आपसी लेनदेन के समय कुछ सावधानियां जरूर बरती जाएं वरना पैसा रिश्तों व अपनेपन को दरका देता है.

नए जमाने की यह कहावत श्रुति और स्मृति पर आधारित न हो कर ढेरों अनुभवों व उदाहरणों का निचोड़ है कि अगर रिश्तेदारी बिगाड़नी हो तो उधार ले लो या फिर उधार दे दो. अर्थशास्त्र के शुरुआती पाठों में ही पढ़ा दिया जाता है कि फाइनैंस का एक बड़ा स्रोत व्यक्तिगत भी होता है. इन्हीं पाठों में बताया जाता है कि सहज उपलब्ध होने के साथसाथ इस तरह के फाइनैंस की एक खासियत यह भी है कि इस में ब्याज या अवधि का दबाव नहीं होता. पढ़ाया हालांकि यह भी जाता है कि दोस्तीयारी और रिश्तेदारी में लेनदेन अकसर रिश्तों के लिए नुकसानदेह साबित होता है और उन के टूटने की वजह भी बनता है.

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