कई दिनों से बराबर महसूस कर रहा था कि पोता अपनी दादी के साथ खींची मेरी पुरानी फोटो से परेशान है. इस बारे में उस ने मुझ से कई बार हंसीहंसी में गंभीरता से कहा भी, ‘‘दादू, या तो दीवार पर से इस फोटो को हटा दो या फिर इस घर से खुद हट जाओ. पुराने इस्तेमाल हो चुके सामान की अब यहां कोई जगह नहीं. यार दादू, समझते क्यों नहीं कि अब पुरानी चीजें संभाल कर रखने का रिवाज खत्म हो गया है. अगर आंखों में जरा सी भी रोशनी बची हो तो देखो, लोग कैसे घर का बेकार पड़ा सामान निकालनिकाल कर नोटों से फटी जेबें भरे जा रहे हैं और एक आप हो कि बाबाआदम के जमाने में जी रहे हो. अगर अपने पर तरस नहीं आता तो हम पर तो तरस खाओ, दादू.

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