बाजार की मंदी के चलते हमारी फैक्टरी में छंटनी हो गई. मैं उतरे मुंह जब घर पहुंचा तो देखा हमारी आदर्श महिला, हमारी एकमात्र पत्नी अपनी मां के साथ गरमागरम पकौड़े खा रही थी. बड़े मग में चाय भरी थी और उस की भाप उड़उड़ कर कमरे में खुशबू फैला रही थी.
हमारे उतरे चेहरे को देख कर हमारी सास ने कहा, ‘‘क्यों दामादजी, क्या हाल हैं? हमारे आने की कोई खुशी नहीं
हुई क्या?’’

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