पहले सरकार से हर रोज कोई न कोई शिकायत रहती थी. अब केवल खुद से रहने लगी है. आज तक न तो सरकार से मुझे अपनी शिकायतों का हल मिला, न ही खुद से.

सरकार द्वारा जनता की शिकायतों के हल के लिए खुले हर 'शिकायत निवारण कक्ष' के बाहर जब तक टांगों में दम रहा, मैं घंटों खड़ा रहा. बहुत बार तो 'शिकायत निवारण कक्ष' के मुंह पर

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