बनवारी ने घर में लोन ले कर भैंस पाल रखी है. पर दूध के लिए नहीं, भैंस गोबर और भैंस मूत्र के लिए. आजकल न सरकार दूध देती है, न भैंस. पर भाई साहब, इस का मतलब यह बिलकुल नहीं हो जाता कि सरकार और भैंस को पालना बंद कर दो. कुछ काम नफेनुकसान की सोचने के बदले परंपरा निभाने के लिए भी करने पड़ते हैं.

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