आश्चर्य मत करिए, इतना परेशान होने की भी जरूरत नहीं है. कोई चाहे कुछ कहे, कुछ समझे, हम तो खम ठोक कर कहेंगे कि कमीशनखोरी हमारा नैतिक, पारिवारिक, सामाजिक तथा उस सब से ऊपर उठ कर राष्ट्रीय दायित्व, राष्ट्रीय कर्तव्य है. बिना कमीशन लिए कोई भी कार्य करना सिर्फ अपराध ही नहीं बल्कि घोर राष्ट्रद्रोह है, जिस के अपराधी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए. बिना कमीशन लिए किसी का कोई भी कार्य करना, अनैतिक ही नहीं अपने ही बंधुबांधवों के साथ अन्याय भी है. इस से पूरे समाज में एक गलत संदेश भी जाता है कि बिना रुपयापैसा लिएदिए भी कार्य हो सकते हैं. साथ ही, इस से रुपए की क्रयशक्ति पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगता है क्योंकि आमतौर पर यह माना जाता है कि रुपयों के द्वारा कुछ भी खरीदा जा सकता है, किसी को भी खरीदा जा सकता है. तो फिर क्या इन रुपयों से एक अदने से ईमान को नहीं खरीदा जा सकता?

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