ज्यादातर लोगों का मानना है कि बिना पटाखों के दीवाली अधूरी होती है, लेकिन लोग यह नहीं समझते कि पटाखों से निकलने वाला धुआं न केवल हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बहुत हानिकारक है. पटाखे में भरा बारूद अस्थमा के रोगियों के लिए जानलेवा होता है. सर्वोच्च न्यायालय ने अपने हाल के फैसले में पटाखों का प्रयोग करने की इजाजत दीवाली की रात आठ से दस बजे के बीच दी है. मात्र दो घंटे. लेकिन अदालत का फैसला मानने वाले कम ही हैं. दशहरे के बाद से ही देश में पटाखे जलने शुरू हो जाते हैं. प्रदूषण के कारण फेस्टिव सीजन का सारा मजा खत्म हो जाता है. बाजारों में लोग नाक पर मास्क और रूमाल बांधे नजर आते हैं. बच्चे और बुजुर्ग खांस-खांस कर परेशान होते हैं.

Tags:
COMMENT