हौकी के लिए अच्छी खबर यह है कि भारतीय हौकी ने मलयेशिया में खेले गए चैंपियंस ट्रौफी में पाकिस्तान को 3-2 से हरा कर एशियाई चैंपियंस ट्रौफी अपने नाम कर ली.

भारत के लिए रुपिंदर पाल सिंह, अफ्फान यूसुफ और निकिन थिमैया ने गोल दागे जबकि पाकिस्तान की ओर से मोहम्मद अलीम बिलाल और अली शान ने गोल दागे.

इस से पहले दक्षिण कोरिया के इंचियोन में वर्ष 2014 में एशियाई खेलों के बाद पहली बार दोनों टीमें किसी महाद्वीपीय टूर्नामैंट के फाइनल मुकाबले में आमनेसामने थीं. वर्ष 2011 में भारत ने पहले संस्करण का खिताब जीता था. वहीं वर्ष 2012 और 2013 में इस टूर्नामैंट का विजेता पाकिस्तान रहा था.

इस जीत के बाद भारतीय हौकी टीम के कप्तान व गोलकीपर श्रीजेश ने कहा कि टीम अपनी भावनाओं पर काबू रखते हुए पैशन के साथ खेली और खिताब पर कब्जा जमाया. हालांकि वे चोट की वजह से फाइनल मैच खेल नहीं पाए, उन की जगह आकाश छिकते भारत के गोलकीपर रहे.

एक जमाना था जब हौकी हमारे लिए जनून की तरह होती थी पर पिछले कुछ वर्षों से हौकी के दिन ठीक नहीं चल रहे हैं. खिलाडि़यों को अभ्यास करने के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव रहा, पैसों की कमी के चलते खिलाडि़यों में मायूसी छाई रही. हौकी के प्रति नए खिलाडि़यों का रुझान खास नहीं रहा. पर अब युवा खिलाडि़यों में जोश व जज्बा दिख रहा है और इसी जोश व जज्बे के कारण भारतीय हौकी टीम ने पाकिस्तान को मात दे कर खिताब जीता है. हो सकता है कि आने वाले दिनों में हौकी के भी दिन फिर जाएं.

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