भारतीय हौकी पिछले कुछ महीनों से सुर्खियों में है. सुर्खियों में रहने का कारण कोई विवाद नहीं है बल्कि भारतीय टीम फिलहाल शानदार खेल का प्रदर्शन कर रही है. वह अपने सुनहरे दिनों को हासिल करने के लिए लगातार प्रयासरत है और एशियाई चैंपियंस टूर्नामैंट में यह देखने को मिल भी चुका है जिस में पाकिस्तान को धूल चटा कर उस ने अपने खेल का लोहा मनवाया.

फिलहाल जूनियर हौकी वर्ल्ड कप की मेजबानी भारत दूसरी बार कर रहा है और जूनियर खिलाडि़यों में भारतीय टीम के कप्तान हरजीत सिंह, स्ट्राइकर मनदीप सिंह, ड्रैग फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह और गोलकीपर विकास दहिया जैसे ऐसे युवा खिलाड़ी हैं जो विपक्षी टीम को धूल चटाने का माद्दा रखते हैं. इस से पहले भारत ने 2001 में आस्ट्रेलिया के हौबर्ट में फाइनल में अर्जेंटीना को 6-1 से हरा कर विश्वकप जीत कर देश का नाम रोशन किया था. उस दौर के कई खिलाड़ी भारतीय हौकी टीम में भी अपना नाम कमा चुके हैं.

उम्मीद है कि इस बार भी भारतीय हौकी की जूनियर टीम से कुछ ऐसे खिलाड़ी भी उभर कर निकलेंगे जो खेल को बुलंदियों तक पहुंचाने में भूमिका निभाएंगे.

भारतीय हौकी टीम के खिलाडि़यों को अपनी फिटनैस पर ध्यान देना होगा, उन्हें चुस्तदुरुस्त रहना होगा. भारतीय टीम को यदि आगे ले जाना है तो खिलाडि़यों को कड़ी मेहनत करनी होगी क्योंकि इन दिनों दुनिया की कई बड़ी टीमें लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं.

आस्ट्रेलिया, नीदरलैंड और जरमनी जैसी टीमों से मुकाबला करने के लिए खास रणनीति बनानी होगी. खेल संघों में एकजुटता दिखानी होगी. हौकी के नाम से राजनीति करने

वाले पदाधिकारियों को हौकी के हित के लिए सोचना होगा क्योंकि बहुत सालों बाद हौकी का प्रदर्शन पहले के मुकाबले अच्छा हो रहा है.    

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