ओ तेरी द्य
 
दर्शकों को कौमनवैल्थ घोटाले के बारे में याद होगा. नई दिल्ली स्थित खेलगांव में बन रहा एक ओवरहैड ब्रिज कौलेप्स हो गया था. उस वक्त कई बातें उजागर हुई थीं और पाया गया था कि कौमनवैल्थ गेम्स को आयोजित कराने वाले अधिकारियों ने जम कर घोटाला किया था. इस स्कैम के लिए सरकार के एक मंत्री को जेल की हवा भी खानी पड़ी थी.
‘ओ तेरी’ फिल्म भी उसी घोटाले को बेनकाब करती लगती है, साथ ही सत्ता में बैठे नेताओं और मीडिया की मिलीभगत को भी दिखाती है. फिल्म का विषय तो अच्छा है, लेकिन निर्देशक उमेश बिष्ट इसे सही तरीके से बना नहीं पाया है. उस ने 2 नए कलाकारों पुलकित सम्राट और बिलाल अमरोही से बेवकूफों जैसी ऐक्टिंग करा कर फिल्म का बंटाधार ही किया है.
 
इस फिल्म को सलमान खान के बहनोई अतुल अग्निहोत्री ने बनाया है, जिस ने सलमान को ले कर ‘बौडीगार्ड’ बनाई थी. सलमान खान ने अपने बहनोई को सपोर्ट करते हुए इस फिल्म में अपना एक आइटम डांस भी डलवाया है. यह डांस गीत फिल्म के अंत में है. यही डांस गीत कुछ अच्छा है बाकी सारी फिल्म बोर ही करती है.
कहानी एक टीवी चैनल में काम कर रहे 2 युवा रिपोर्टरों प्रताप उर्फ पीपी (पुलकित सम्राट) और आनंद उर्फ एड्स (बिलाल अमरोही) की है. दोनों किसी बे्रकिंग न्यूज को हासिल करने के लिए शहर में घूम रहे हैं. असफल रहने पर चैनल हैड मौनसून (सारा जेन डियास) उन्हें नौकरी से निकाल देती है. तभी एक दिन उन्हें कौमनवैल्थ गेम्स के दौरान बन रहे एक ओवरहैड ब्रिज के टूटने के घोटाले को उजागर करने का मौका मिल जाता है. इस घोटाले में एक मंत्री ख्वाजा (अनुपम खेर) के साथसाथ शैरी (मंदिरा बेदी), ठेकेदार नाहटा और चैनल हैड मौनसून भी शामिल हैं. ख्वाजा पीपी और एड्स के पीछे पड़ जाता है. उस के आदमी इन दोनों की जान के दुश्मन हो जाते हैं लेकिन किसी तरह अपनी जानें बचाते हुए ये दोनों इस स्कैम का पर्दाफाश टीवी चैनल पर कर देते हैं. पुलिस सभी स्कैम करने वालों को पकड़ कर ले जाती है.
फिल्म की यह कहानी एकदम कमजोर है. कुछ संवाद फनी हैं. पुलकित सम्राट और बिलाल अमरोही ने ऊटपटांग हरकतें ही की हैं. बिलाल अमरोही ने तो सलमान की नकल करने की कोशिश की है. सारा जेन डिया ने भी निराश किया है.
फिल्म का निर्देशन बेकार है. निर्देशक ने फिल्म का आइडिया ‘जाने भी दो यारो’ से उड़ाया है. उस ने अनुपम खेर को सुरेश कलमाड़ी और मंदिरा बेदी को नीरा राडिया जैसा दिखाने की असफल कोशिश की है. करप्ट सिस्टम को अपने नौसिखिया कलाकारों से ठीक कराने की उस की कोशिश नाकाम ही रही है. इस के अलावा फिल्म में एक कुत्ते द्वारा भविष्य बताने और भैंस की सेहत को ले कर परेशान गांव वालों की बेसिरपैर की बातें भी भरी पड़ी है.
फिल्म के गाने जबरन ठूंसे गए लगते हैं. फूहड़ जोक्स बोर करते हैं. छायांकन कुछ हद तक ठीक है.

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