आज के व्यस्त महानगरीय जीवन में हर व्यक्ति के पास समय का अभाव है. ऐसे में यदि बड़ा भाई घर के छोटेछोटे कामों में मातापिता का हाथ बंटाए, तो कामकाजी पेरैंट्स को सहारा तो मिलता ही है साथ ही युवा हो रहे बच्चों में जिम्मेदारी का भाव भी पैदा होता है.

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