ग्रैजुएशन के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हरेंद्र का अधिकांश समय पढ़ाई और घर के कामकाज में गुजरता था. बचे समय में मूड फ्रैश करने के लिए वह दोस्तों के साथ थोड़ी मौजमस्ती कर लेता था. सभी उस की तारीफ करते थे खासतौर से उस के पापा तो उस पर गर्व करते थे. अपनी तारीफ सुन हरेंद्र फूला न समाता और वह और अधिक जिम्मेदारी से काम करता. कुछ दिन पहले उस के पापा दफ्तर के काम से 8 दिन के लिए बाहर गए तो जातेजाते उसे बिजली का बिल और 800 रुपए यह कह कर थमा गए कि कल बिल भरने की आखिरी तारीख है, याद से बिल जमा कर देना नहीं तो कनैक्शन कट जाएगा और पैनल्टी भी लग जाएगी.

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