फिल्म ‘थ्री इडियट्स,’ जो स्कूलकालेज के छात्रों के बीच कल्ट स्टेटस पा चुकी है, बैकबैंचर्स की बड़ी दिलचस्प कहानी है. फरहान कुरैशी और राजू रस्तोगी नाम के छात्र एक इंजीनियरिंग कालेज में दाखिला लेते हैं और वे अपने दब्बूपन और परंपरागत एटिट्यूड के चलते बैकबैंचर बनने पर मजबूर हैं. क्लास में सरेआम उन का मजाक बनाया जाता है. वे प्रोफैसर के सामने किसी सवाल का जवाब देने से पहले हकलाने लगते हैं, जब कालेज में उन के तीसरे रूममेट रणछोड़दास श्यामल दास छाछड की ऐंट्री होती है तो नजारा ही बदल जाता है. अपने मुखर व्यवहार और हाजिरजवाबी से रणछोड़दास न सिर्फ ट्रैडिशनल सिस्टम को तोड़ कर कालेज में नंबर वन बन जाता है बल्कि फरहान और राजू जैसे बैकबैंचर्स में नया आत्मविश्वास भर कर इन्हें फ्रंटबैंचर बना देता है.

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