आपरेशन मासूम के तहत फर्रूखाबाद के जिस सुभाष बाथम को सिरफिरा कह कर पुलिस मुठभेड में मार गिराया उसको सिरफिरा बनाने में व्यवस्था का पूरा दोष है. सुभाष बाथम कोई पहली आदमी नहीं है जिसे सिरफिरा कहा गया है. कुछ साल पहले की ही घटना है जब बस्ती जिले में एक सपेरा तहसील में अपनी परेशानियों से निजात नहीं पा सका तो उसने तहसील परिसर में ही सांप छोड दिये थे. कई साल पहले ही बात है राजधानी लखनऊ में कटोरी देवी नामक महिला चर्चा में थी. स्कूल शिक्षिका कटोरी देवी को गलत तरह से नौकरी से बाहर कर दिया गया. कटोरी देवी ने उत्तर प्रदेश की विधानसभा के सामने धरना स्थल पर 14 साल धरना दिया. कटोरी देवी के खिलाफ पुलिस ने हर छलबल का प्रयोग किया. इसके बाद भी उसका धरना नहीं टूटा. व्यवस्था ने नहीं सुनी कोर्ट से उसको 14 साल के बाद न्याय मिल सका.

Tags:
COMMENT